लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी), गोरखपुर में ‘हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए सतत प्रक्रियाओं’ पर पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम का शीर्षक “सस्टेनेबल प्रोसेसेस फॉर ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन (एसपीजीएचपी-2026)” है, जो 12 से 16 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। यह एफडीपी शिक्षकों, शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों को हरी ऊर्जा के नवीनतम विकास से अवगत कराने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान कर रहा है। कार्यक्रम का उद्घाटन 12 जनवरी 2026 को एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. जेपी सैनी की अध्यक्षता में हुआ। उद्घाटन सत्र में अपने उद्बोधन में कुलपति ने हरी हाइड्रोजन को भविष्य की ऊर्जा क्रांति का आधार बताया और कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षण संस्थानों को उद्योग की आवश्यकताओं से जोड़ते हैं। कार्यक्रम में देश भर से 150 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जिनमें सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और शोध छात्र शामिल हैं। एफडीपी के दौरान विभिन्न विषयों पर व्याख्यान और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जैसे: इलेक्ट्रोलाइसिस प्रक्रिया, सौर और पवन ऊर्जा से हाइड्रोजन उत्पादन, पर्यावरण अनुकूल कैटेलिस्ट विकास, हाइड्रोजन भंडारण और परिवहन तकनीकें, तथा ग्रीन हाइड्रोजन की आर्थिक व्यवहार्यता। प्रमुख वक्ताओं में शामिल हैं: प्रो. धनंजय सिंह (निदेशक, रसायनिक इंजीनियरिंग कॉलेज, अहमदाबाद नगर), जो हाइड्रोजन उत्पादन की नवीन तकनीकों पर व्याख्यान देंगे; असिस्टेंट प्रोफेसर रसायनिक अभियंत्रिकी, एमएमएमयूटी गोरखपुर से डॉ. जितेंद्र कुमार; और अन्य विशेषज्ञ जो उद्योग के अनुभव साझा करेंगे। इस कार्यक्रम के संयोजक प्रो. एसओ दासगुप्ता (भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु) ने बताया, “ग्रीन हाइड्रोजन जलवायु परिवर्तन से निपटने का एक प्रभावी समाधान है। यह एफडीपी प्रतिभागियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करेगा, जिससे वे अपने संस्थानों में हरी ऊर्जा परियोजनाएं शुरू कर सकेंगे।” वहीं, एमएमएमयूटी के रसायनिक अभियंत्रिकी विभाग के प्रमुख ने जोड़ा, “यह कार्यक्रम भारत सरकार की ग्रीन हाइड्रोजन नीति के अनुरूप है और हमें 50 करोड़ रुपये के अनुदान से एक उन्नत शोध केंद्र स्थापित करने में मदद मिलेगी।” यह एफडीपी अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) द्वारा प्रायोजित है और इसमें ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों मोड में भागीदारी की सुविधा है। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे, जो उनके करियर विकास में सहायक होंगे।
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