लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग के शोधकर्ताओं ने चिकित्सा विज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में एक बड़ी और क्रांतिकारी सफलता हासिल की है। कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रो. पुनीत मिश्रा के नेतृत्व में रिसर्च स्कॉलर मो. उस्मान, प्रज्ञनिक्स लैब्स के सिद्धार्थ चौरसिया और मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर की डॉ. गिनिका महाजन ने मिलकर गले के कैंसर (Laryngeal Malignancies) की पहचान और वर्गीकरण के लिए एक अत्याधुनिक AI मॉडल ‘MedLK-SCNet’ विकसित किया है। यह महत्वपूर्ण शोध पत्र (Research Paper) प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल प्रकाशन नेचर पोर्टफोलियो के ‘Scientific Reports’ में प्रकाशित हुआ है, जो लखनऊ विश्वविद्यालय के लिए एक अत्यंत गौरवपूर्ण उपलब्धि है। लारेंजियल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (LSCC) फेफड़े के कैंसर के बाद सांस नली से जुड़ा दूसरा सबसे आम और जानलेवा कैंसर है। तंबाकू, बीड़ी-सिगरेट और गुटखा के अत्यधिक सेवन के कारण उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। शुरुआती अवस्था में कैंसर के सूक्ष्म लक्षणों को साधारण एंडोस्कोपी से पहचानना बेहद जटिल और समय लेने वाला होता है। समय पर सही पहचान न होने के कारण मरीजों का इलाज में देरी हो जाती है, जिससे जान का खतरा बढ़ जाता है। विकसित किया गया ‘MedLK-SCNet’ मॉडल एक मल्टी-स्केल पदानुक्रमित संलयन तंत्रिका नेटवर्क (Multi-Scale Hierarchical Fusion Neural Network) है। यह मॉडल नैरो बैंड इमेजिंग (NBI) और एंडोस्कोपिक छवियों का विश्लेषण करके कैंसर के मुख्य व सूक्ष्म रक्त वाहिका पैटर्न (Microvascular Patterns) को अत्यधिक सटीकता (High Precision) के साथ वर्गीकृत करता है। यह कंप्यूटर की जटिलता को कम करते हुए छवियों की गहरी बारीकियों को समझता है, जिससे डॉक्टरों को त्वरित और सटीक निर्णय लेने में मदद मिलती है।
सामाजिक सरोकार और आम जनता पर प्रभाव (Social Connect):
- शुरुआती पहचान से जीवन रक्षा: कैंसर निदान में समय पर बीमारी का पता चलना ही सबसे महत्वपूर्ण है। इस AI मॉडल से शुरुआती स्टेज पर ही कैंसर की पहचान हो सकेगी, जिससे मरीजों के इलाज की सफलता और उनके जीवित रहने की संभावना (Survival Rate) में गुणात्मक वृद्धि होगी।
- ग्रामीण व दूर-दराज क्षेत्रों के लिए संजीवनी: भारत के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक पैथोलॉजी लैब्स की भारी कमी है। यह AI सिस्टम साधारण मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ जुड़कर कम कुशल मेडिकल स्टाफ को सटीक डायग्नोस्टिक मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
- सस्ता और किफायती डायग्नोस्टिक इलाज: AI-संचालित स्वचालित स्क्रीनिंग से बार-बार होने वाले जटिल और महंगे टेस्ट्स का खर्चा कम होगा। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर मेडिकल खर्चे का बोझ काफी हद तक कम होगा।
- स्वास्थ्य तंत्र पर दबाव कम होना: अस्पतालों और डॉक्टरों पर मरीजों का भार लगातार बढ़ रहा है। ऑटोमेटेड विजुअल एनालिसिस से डॉक्टरों का कीमती समय बचेगा और वे अधिक मरीजों का प्रभावी इलाज कर सकेंगे।
शोध के प्रमुख विशेषज्ञ प्रो. पुनीत मिश्रा का आधिकारिक वक्तव्य:
“हमारा मुख्य उद्देश्य ऐसी AI तकनीक तैयार करना था जो केवल कागजों या लैब तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक इसका लाभ पहुंचे। ‘MedLK-SCNet’ मॉडल डॉक्टरों के लिए एक सहायक टूल के रूप में कार्य करेगा, जिससे गले के कैंसर की शुरुआती पहचान आसान, तेज और सस्ती हो सकेगी।”
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