लखनऊ। भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मशताब्दी वर्ष 2024-2025 उपलक्ष्य में आज मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में ‘सुशासन की अवधारणा और राष्ट्र निर्माण में श्री अटल बिहारी वाजपेयी का अवदान’ विषयक एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता के रूप में दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के प्रो प्रत्यूष दुबे मौजूद रहे जबकि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय कुलपति प्रो जे पी सैनी थे। संगोष्ठी के आरम्भ में मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन तथा वाग्देवी सरस्वती, पंडित मालवीय एवं श्री अटल बिहारी वाजपेयी के चित्र पर माल्यार्पण किया। स्वागत वक्तव्य प्रो बी के पांडेय ने दिया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रो प्रत्यूष दुबे ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास की रामराज्य की परिकल्पना दुनिया में आदर्श राज्य की अवधारणा का सबसे सशक्त मॉडल है और श्री अटल बिहारी वाजपेयी का प्रयास इसी राम राज्य की परिकल्पना को साकार करना था। वे सत्ता में रहे हों या विपक्ष में, यह रामराज्य का सपना सदैव उनकी विचार सरणि की धुरी रहा है। श्री वाजपेई एक स्वप्नद्रष्टा और कविहृदय राजनयिक थे जो भारतीय आदर्श वसुधैव कुटुंबकम् को साकार करने के लिए किसी को भी गले लगाने को तत्पर रहते थे। राष्ट्र प्रथम उनकी चिंतन का केंद्रबिंदु था, और राष्ट्र की एकता, अखंडता के लिए कोई भी बलिदान देने को तत्पर रहते थे। वाजपेई जी का कहना था कि सरकारें आती हैं, जाती हैं, पर देश रहना चाहिए और जरूरत पड़ने पर देश के लिए सरकार को कुर्बान कर देना यह उनका आदर्श था। उन्होंने सत्ता के लिए किसी तरह का कोई समझौता नहीं किया। देश आम सहमति से चलना चाहिए यह उनके राजनयिक आचार विचार का आधार रहा है। उनका मानना था कि राष्ट्र निर्माण एक सतत प्रक्रिया है, निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और स्वर्णिम चतुर्भुज योजना उनके कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि थी। इस मौके पर एन पी टी ई एल परीक्षाओं में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं को मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता द्वारा सम्मानित किया गया। संगोष्ठी के अंत डॉ हरीश चंद्र ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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