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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर में स्वायत्त और विद्युत वाहनों की चुनौतियाँ एवं उन्नतियाँ” कार्यक्रम संपन्न

लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा ए आई सी टी ई टीचिंग एंड लर्निंग एकेडमी (अटल एकेडमी) के सहयोग से “स्वायत्त और विद्युत वाहनों की चुनौतियाँ एवं उन्नतियाँ” विषयक साप्ताहिक संकाय विकास कार्यक्रम का आज समापन हो गया। 27 जनवरी से 1 फरवरी 2025 तक चले इस कार्यकम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने इलेक्ट्रिक वाहनों की तकनीक, बैटरी प्रबंधन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरणीय प्रभाव और औद्योगिक चुनौतियों पर अपने विचार रखे। संकाय विकास कार्यक्रम में देशभर के विभिन्न संस्थानों से 200 से अधिक  प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे. पी. सैनी ने अपने संबोधन में इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग और इससे जुड़े अवसरों तथा चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र न केवल तकनीकी बल्कि पर्यावरणीय और आर्थिक दृष्टिकोण से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आवश्यक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी की दीर्घायु और पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) जैसी चुनौतियों का समाधान करने के लिए शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं को मिलकर काम करने की जरूरत है। कार्यक्रम का पहला सत्र प्रो. रमेश बंसल (यूनिवर्सिटी ऑफ शारजाह, यूएई) के व्याख्यान से प्रारंभ हुआ, जिन्होंने “इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक का अवलोकन” विषय पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रिक वाहनों, उनके संचालन, बैटरी टेक्नोलॉजी, मोटर ड्राइव सिस्टम और ऊर्जा दक्षता के पहलुओं को समझाया। इसके बाद प्रो. रंजन कुमार बेहेरा (आईआईटी पटना) ने “पावर इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी फॉर रिन्यूएबल एनर्जी एप्लिकेशन” पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों का तालमेल कैसे ऊर्जा संकट को दूर कर सकता है। दूसरे दिन डॉ. राहुल दुबे (सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका) ने “सेंसर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल्स फॉर कंट्रोल ऑफ ऑटोनोमस कार्स” विषय पर गहराई से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत सेंसर तकनीकें स्वायत्त वाहनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसके बाद प्रो. विजय प्रताप सिंह (आरईसी सोनभद्र) ने “इलेक्ट्रिक व्हीकल एग्रीगेटर्स: ए गेम चेंजर इन एनर्जी मार्केट पार्टिसिपेशन” विषय पर चर्चा की। तीसरे दिन प्रो. आशीष कुमार सिंह (एनआईटी प्रयागराज) ने “सेकंड लाइफ़ बैटरी फॉर विद्युत वाहनों ” विषय पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैटरियों की ऊर्जा क्षमता और चार्जिंग समय को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। इसके बाद डॉ. बृज नारायण सिंह (जॉन डीरे, नॉर्थ डकोटा, यूएसए) ने “परिशुद्ध एवं पर्यावरण हितैषी कृषि के लिए पावर इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम” पर व्याख्यान दिया। उन्होंने आधुनिक कृषि में उन्नत पावर इलेक्ट्रॉनिक्स तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया, जिससे किसानों को अधिक ऊर्जा-कुशल समाधान उपलब्ध हो सकते हैं। चौथे दिन प्रो. (डॉ.) मनप्रीत सिंह मन्ना (कुलपति, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय) ने “स्वायत्त और विद्युत वाहनों की चुनौतियाँ एवं पर्यावरणीय प्रभाव” विषय पर गहन विचार-विमर्श किया। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के साथ-साथ बैटरी निर्माण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और रिसाइक्लिंग जैसी चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं, जिन्हें दूर करना आवश्यक है। इसके बाद प्रो. संतोष कुमार सिंह (आईआईटी बीएचयू) ने “अडवांस्ड पावर इलेक्ट्रॉनिक्स फॉर इंटीग्रेशन ऑफ एनर्जी वेक्टर्स” विषय पर व्याख्यान दिया।पाँचवे दिन प्रो. आर. के. सिंह (एनआईटी प्रयागराज) ने ” विद्युत वाहनों चार्जिंग: रिलायबिलिटी इशूज इन पावर कंवर्टर्स” विषय पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि चार्जिंग प्रक्रिया में स्थायित्व और विश्वसनीयता बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। इसके बाद प्रो. शैलेन्द्र कुमार (आईआईटी भिलाई) ने “रीसेंट टेक्नोलॉजी इन विद्युत वाहन चार्जिंग एंड इट्स क्लासिफिकेशन” पर जानकारी दी। छठे दिन प्रो. कुवर आदित्य (आईआईटी जोधपुर) ने “वायरलेस पावर ट्रांसफर फॉर ट्रांसपोर्टेशन: मैग्नेटिक्स डिजाइन एंड कंट्रोल स्ट्रेटजीज फॉर इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग” विषय पर चर्चा की। इसके बाद प्रो. राकेश मौर्या (एनआईटी सूरत) ने “इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग विद मल्टी-फंक्शनल फीचर्स” विषय पर अपनी बात रखी। अंतिम सत्र में प्रो. संजीत कुमार द्विवेदी (एवरफ्यूल, डेनमार्क) ने “ग्रीन फ्यूल-बेस्ड मोबिलिटी: चैलेंजेज एंड ऑपॉर्चुनिटीज” विषय पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि हाइड्रोजन फ्यूल सेल और अन्य ग्रीन एनर्जी स्रोत इलेक्ट्रिक वाहनों के भविष्य को और अधिक टिकाऊ बना सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में ऑनलाइन टेस्ट और फीडबैक सत्र आयोजित किया गया, जिसके पश्चात समापन समारोह हुआ। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. नवदीप सिंह ने बताया कि इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का उद्देश्य शिक्षकों को इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी के नवीनतम पहलुओं से अवगत कराना और शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से प्रतिभागियों को अत्याधुनिक तकनीकों की गहरी समझ प्राप्त हुई। कार्यक्रम के दूसरे समन्वयक प्रो. अमर नाथ तिवारी (विद्युत विभाग, एमएमएमयूटी) ने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस तरह के कार्यक्रम शिक्षकों और शोधकर्ताओं को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने और नए शोध क्षेत्रों को समझने में मदद करते हैं। कार्यक्रम के चेयरमैन एवं विद्युत विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार गिरि ने कहा कि यह कार्यक्रम इलेक्ट्रिक वाहनों की तकनीकी समझ को बढ़ाने के लिए बेहद उपयोगी रहा। उन्होंने बताया कि इस तरह के शैक्षणिक आयोजनों से प्रतिभागियों को नवीनतम शोध और औद्योगिक प्रगति के बारे में जानकारी मिलती है। इस अटल एआईसीटीई  फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में देशभर से 200 से अधिक शिक्षकों, इंजीनियरों, पीजी छात्रों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी टेक्नोलॉजी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के साथ एकीकरण, वायरलेस चार्जिंग तकनीक और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और इलेक्ट्रिक वाहनों की भविष्य की संभावनाओं पर व्यापक संवाद किया।

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