लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर को 04 वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर्स एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) के संचालन हेतु राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद, नई दिल्ली से मान्यता मिल गई है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की नॉर्थ रीजनल कमेटी के क्षेत्रीय निदेशक ने कुलसचिव को भेजे ई मेल के माध्यम से एन सी टी ई की मान्यता मिलने और इस संबंध में लैटर ऑफ इंटेंट जारी किए जाने की जानकारी दी। ई मेल के माध्यम से यह भी बताया गया है कि यह मान्यता कुछ शर्तों के अधीन है, जैसे कि विश्वविद्यालय को ITEP पाठ्यक्रम में अध्यापन हेतु एन सी टी ई के मानकों के अनुरूप योग्यता धारक शिक्षकों की नियुक्ति करनी होगी और उनकी सूची एन सी टी ई को उपलब्ध करानी होगी। मान्यता की एक शर्त यह भी है कि विश्वविद्यालय को अपनी वेबसाइट को NCTE से हाइपरलिंक कर अपेक्षित सूचनाऐं उस कर प्रदर्शित करनी होंगी और पाठ्यक्रम संचालन हेतु निर्धारित धनराशि एक कोष में जमा करनी होंगी जिसे विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय निदेशक द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जाएगा। मान्यता के बाद विश्वविद्यालय शैक्षणिक सत्र 2025-26 से इंटीग्रेटेड टीचर्स एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) का संचालन करेगा और 100 सीटों पर प्रवेश लेगा। एम एम एम यू टी से यह चार वर्षीय पाठ्यक्रम पूरा करने पर संबंधित विद्यार्थियों को बी एस सी + बी एड की डिग्री दी जाएगी। इस पाठ्यक्रम में बारहवीं पास करनेवाले अभ्यर्थी प्रवेश ले सकेंगे। प्रवेश हेतु प्रतिवर्ष नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एन टी ए) द्वारा नेशनल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट फॉर एडमिशन टू ITEP आयोजित किया जाता है और इसी प्रवेश परीक्षा की मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। बताते चलें कि पिछले वर्ष 20 मई को विश्वविद्यालय ने ITEP की मान्यता के लिए एन सी टी ई को ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन के नियमों एवं शर्तों के अनुसार विश्वविद्यालय ने ITEP के संचालन हेतु अपने सर्वोच्च शासी निकाय प्रबंध बोर्ड से जुलाई 2024 में स्वीकृति प्राप्त की थी। साथ ही राज्य सरकार से भी स्वीकृति का अनुरोध किया था जो विश्वविद्यालय को जनवरी 2025 में प्राप्त हो गया था। उसी क्रम में मान्यता प्रदान करने से पूर्व, विश्वविद्यालय में उपलब्ध भौतिक संसाधन एवं सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए एन सी टी ई द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने मार्च 2025 में विश्वविद्यालय की वर्चुअल विजिट भी की थी। विश्वविद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं/ संसाधनों को मानक पर खरा पाए जाने पर विशेषज्ञ समिति ने मान्यता प्रदान करने की संस्तुति की जिसके आधार पर मान्यता प्रदान की गई है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू होने के बाद से स्कूली पाठ्यचर्या में परिवर्तन कर उसे पुनर्गठित कर दिया गया है। इसी पुनर्गठन को ध्यान में रखते हुए स्कूली शिक्षा में गुणात्मक सुधार के उद्देश्य से शिक्षक प्रशिक्षण के लिए यह नया चार वर्षीय पाठ्यक्रम आरम्भ किया गया है। वर्तमान में ITEP आई आई टी खड़गपुर, आई आई टी भुवनेश्वर, आई आई टी जोधपुर, एन आई टी कालीकट, एन आई टी वारंगल, एन आई टी पुडुचेरी, एन आई टी सूरथकल, एन आई टी अगरतला, और एन आई टी जालंधर में भी संचालित है। राष्ट्रीय महत्व के तकनीकी संस्थानों द्वारा चलाए जा रहे ITEP पाठ्यक्रम में नवाचार और टेक्नोलॉजी आधारित शिक्षण पर विशेष बल दिया जा रहा है। इससे आने वाले समय में स्कूलों को जो शिक्षक मिलेंगे वे अपेक्षाकृत युवा होंगे और आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, एजुकेशनल टेक्नोलॉजी एवं टेक्नोलॉजी आधारित शिक्षण प्रणालियों से लैस होंगे। इससे स्कूली शिक्षा में नवाचार, डिजिटलीकरण, आधुनिक तकनीक का समावेश हो सकेगा जिसका लाभ आने वाले समय में स्कूली छात्रों को मिलेगा। इसी दृष्टिकोण से यह पाठ्यक्रम एम एम एम यू टी में आरम्भ किया जा रहा है जिससे भविष्य में विश्वविद्यालय को शिक्षक प्रशिक्षण, और एजुकेशनल टेक्नोलॉजी के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके। बताते चलें कि मान्यता प्राप्त होने की प्रत्याशा में विश्वविद्यालय ने पाठ्यक्रम संचालन हेतु आवश्यक शिक्षकों एवं लिपिकीय पदों को स्ववित्तपोषित योजना के अंतर्गत सृजित किए जाने हेतु प्रबन्ध बोर्ड की स्वीकृति भी प्राप्त कर ली है। अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इन पदों को विज्ञापित कर जल्द ही शिक्षकों की नियुक्ति भी की जाएगी।
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