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दलित विरोधी है समाजवादी पार्टी- ओमप्रकाश राजभर

लखनऊ स्थित सुशांत गोल्फ सिटी दयालबाग में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में संगठन की आगामी रणनीतियों, जनहित नीतियों तथा सामाजिक न्याय आधारित लक्ष्यों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर जी, राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव माननीय डॉ. अरविंद राजभर जी, तथा राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। बैठक में संगठन विस्तार, सामाजिक प्रतिनिधित्व, न्यायिक भागीदारी, तथा राष्ट्र निर्माण में शोषित-वंचित समाज की निर्णायक भूमिका सुनिश्चित करने हेतु ठोस प्रस्ताव पारित किए गए। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी संविधान आधारित समतामूलक समाज के निर्माण हेतु “जिसकी संख्या अधिक, उसकी भागीदारी सुनिश्चित” के सिद्धांत पर निष्ठापूर्वक कार्य कर रही है। वहीं बैठक को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव द्वारा विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का सुभासपा घोर निंदा करती है । राजभर ने आगे कहा कि विंग कमांडर व्योमिका सिंह का अपमान हर भारतीय और भारतीय बेटी का अपमान है। व्योमिका सिंह केवल नाम नहीं, बल्कि भारत की गौरव, महिला सशक्तिकरण व नए भारत के उड़ान की प्रतीक हैं। जाति के आधार पर वीरांगना का अपमान कर समाजवादी पार्टी ने अपनी नीच मानसिकता व महिला विरोधी की सोच को उजागर किया है। रामगोपाल यादव का बयान शर्मनाक, निंदनीय व भारतीय वायुसेना के हर जवान का अपमान है। विंग कमांडर व्योमिका सिंह को जाति के आधार पर नीचा दिखाने की कोशिश पूरे दलित समाज की प्रतिभा, परिश्रम व सम्मान पर हमला है। रामगोपाल यादव का बयान पीडीए की उस विकृत सोच का पर्दाफाश है, जो दलितों का सम्मान नहीं करता, उन्हें सिर्फ वोटबैंक मानता है। भारत दलितों का अपमान स्वीकार नहीं करेगा। सपा को पूरे समाज, देश व प्रदेश से माफी मांगनी चाहिए। समाजवादी पार्टी कभी भीमराव आंबेडकर की फोटो से खिलवाड़ करती है तो कभी जाति के साथ खिलवाड़ करती है। देश के प्रति इनकी सोच अच्छी नहीं है। सपा के लोग जान लें कि दलित समाज की बेटी भी वीरांगना हो सकती है, जो सरहद पर जाकर लड़ भी सकती है और देश का मान-सम्मान भी बढ़ा सकती है। जब सपा की सरकार थी तो दलितों के महापुरुषों के नाम को मिटा कर दलित विरोधी होने का प्रमाण पहले दे चुकी है,सचिवालय में समीक्षा अधिकारी पद पर नियुक्त हो चुके 78 दलित कार्मिकों को यह कहकर ज्वाइन कराने से मना कर दिया था कि वे दलित हैं साथ में यह भी कहा था कि अगर तुम लोग दलित न होते तो ज्वाइन कराया जा सकता था, नियुक्त हुए 78 दलित कार्मिकों का कसूर सिर्फ इतना था कि वे दलित थे। दलितों के प्रमोशन में आरक्षण ख़त्म सपा ने किया, सपा नेताओं को दलितों के कपड़े से बदबू तक आती है । दलितों का पिछड़ों का आदिवासियों का वंचितों का अपनाम का बार बार अपमान करने की आदत बन गई है।

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