लखनऊ। मदन मोहन प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस पर माननीय कुलपति प्रोफेसर जयप्रकाश सैनी द्वारा मियावाकी वन का उद्घाटन किया गया। विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्रों द्वारा लगभग 1,000 पौधे और लगभग 40 विभिन्न देशी प्रजातियाँ लगाई गईं। कुल रोपण क्षेत्र 10000 वर्ग फीट है।जापानी वनस्पतिशास्त्री अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित मियावाकी तकनीक, आत्मनिर्भर तरीके से देशी पेड़ों के साथ घने जंगल बनाने में मदद करती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन को कम करने, स्वच्छ हवा प्रदान करने, मिट्टी की गुणवत्ता और जल स्तर में सुधार करने और स्थानीय जैव विविधता को बढ़ाने में मदद मिलती है।इस तकनीक से बहुत ही कम जगह में, कम समय में, एक घना और प्राकृतिक जंगल तैयार किया जाता है। उक्त जंगल बनाए जाने का मुख्य कारण जंगल को बहुत तेजी लगभग से बढ़ाया जाना है जिससे कि अगले 2 से 3 वर्षों में एक घना, आत्मनिर्भर जंगल बन जाए और इसमें मानव हस्तक्षेप बहुत कम होता है। उक्त पौधारोपण कार्यक्रम में पीपल, बरगद, नीम, पाकड़, गुलर, अमलतास , अर्जुन, जामुन, इमली, गुड़हल, कनेर ,आम , बेल, इत्यादि पोंधे लगाए गए। कार्यक्रम मैं विश्वविद्यालय माननीय कुलपति महोदय श्री जे पी सैनी, कुलसचिव श्री चंद्र प्रियदर्शी, प्रो गोविंद पांडे, प्रो डी के द्विवेदी, सुरक्षा प्रभारी डॉ हरीश चंद्र, प्रो पी पी पांडे, प्रो बी के पांडेय, प्रो जय प्रकाश , डॉ अभिजीत मिश्र, श्री ध्रुप चंद, श्री मनोज बलूनी आदि उपस्थित रहे। कुलपति महोदय ने इस अवसर पर कहा कि “जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिनका अनुभव छात्र बड़े होकर करेंगे और इसलिए जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों में मियावाकी वन का विकास विश्वविद्यालय द्वारा किया गया एक सकारात्मक पहल है। कुलपति महोदय द्वारा सभी शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्रों से एक पौधा गोद लेने हेतु प्रेरित किया गया।
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