Breaking News

भूमिहार बाहुल्‍य मुहम्‍मदाबाद विधानसभा में चार दशकों से है भूमिहार विधायक का अकाल

शिवकुमार

गाजीपुर। देश और प्रदेश में सबसे ज्‍यादे भूमिहार बाहुल्‍य मुहम्‍मदाबाद विधानसभा में चार दशको से भूमिहार विधायक का अकाल चल रहा है। एक-दो बार को छोड़ दिया जाये तो लागातार मुहम्‍मदाबाद विधानसभा में अंसारी बंधुओ को कब्‍जा रहा है, पांच बार अफजाल अंसारी, दो बार सिबगतुल्‍लाह अंसारी और वर्तमान में शोएब उर्फ मन्‍नू अंसारी विधायक है जबकि एक बार स्‍व.कृष्‍णानंद राय और दो बार अलका राय विधायक निर्वाचित हो चुकी है। मुहम्‍मदाबाद विधानसभा में लगभग 4 लाख 42 हजार मतदाता है जिसमें सबसे ज्‍यादा सवा लाख के करीब भूमिहार मतदाता है। इसके बावजूद भी भूमिहार प्रत्‍याशियो की लागातार हार हो रही है। जबकि मुहम्‍मदाबाद विधानसभा के तीनो ब्‍लाकों पर भूमिहार ब्‍लाक प्रमुख है। सियासी गलियारो में इस बात की चर्चा है कि सबसे ज्‍यादा बुद्धिजीवी बिरादरी भूमिहार मतदाता होने के बावजूद क्‍यों हो रही है भूमिहार प्रत्‍याशियो की हार?

इस संदर्भ में रिटायर्ड इंजिनियर व राजनैतिक विश्‍लेषक अरबिंद राय ने पूर्वांचल न्‍यूज डॉट काम को बताया कि सन् 1985 से लेकर 2022 तक जीतने भी विधानसभा चुनाव हुए है उसमें दो या दो से अधिक भूमिहार प्रत्‍याशी खड़े हुए जिसके वजह से मतों में विभाजन हुआ और सफलता दूसरे को मिल गयी। इसके अलावा आपसी मतभेद भी हार का प्रमुख वजह रहा है।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार आजादी के बाद से 1985 तक मुहम्‍मदाबाद विधानसभा में भूमिहार प्रत्‍याशियो का दबदबा रहा है, 1985 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के दिग्‍गज नेता विजयशंकर बाबू का टिकट कट गया, उनके जगह पर अभयनारायण राय को प्रत्‍याशी बनाया गया जिससे विजयशंकर बाबू का खेमा नाराज हो गया और निर्दल प्रत्‍याशी के रूप में उनके भतीजे चुनाव लड़ें और उनके शुभचिंतको ने कांग्रेस को पराजित कर दिया और अफजाल अंसारी कम्‍युनिष्‍ट पार्टी के चुनाव चिन्‍ह पर विधायक निर्वाचित हो गये, यहीं से अंसारी बंधुओ का जीत का सिलसिला शुरू हुआ और लागातार 17 वर्षो तक मुहम्‍मदाबाद सीट पर फाटक का कब्‍जा रहा। 2002 में भाजपा के प्रत्‍याशी कृष्‍णानंद राय विधायक निर्वाचित हुए लेकिन कृष्‍णानंद राय की 2005 में हत्‍या हो गयी, जिसके बाद उनकी पत्‍नी अलका राय उपचुनाव में विधायक निर्वाचित हुयी। फिर 2007 और 2012 के चुनाव में सिबगतुल्‍लाह अंसारी विधायक चुने गये। 2017 में अलका राय फिर से बीजेपी से विधायक निर्वाचित हुयी लेकिन 2022 के चुनाव में वह चुनाव हार गयीं और सपा के टिकट पर शोएब उर्फ मन्‍नू अंसारी विधायक चुने गये। अब 2027 का विधानसभा जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है तो फिर से भूमिहार क्षत्रपों में विभिन्‍न दलो से टिकट के लिए होड़ मची है, अब देखना है कि 2027 का परिणाम क्‍या गुल खिलाता है।

 

 

Image 1 Image 2

Check Also

गाजीपुर: पुरानी रंजिश को लेकर दो गुटों में मारपीट, दर्जनों घायल

गाजीपुर। कोतवाली थाना क्षेत्र के बकराबाद गांव में दो गुटों में पुरानी रंजिश को लेकर …