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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर में रचनात्मक सत्रों का हुआ आयोजन

लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर में विद्युत अभियांत्रिकी विभाग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी विकास कार्यक्रम के दूसरे दिन शिक्षकों एवं प्रतिभागियों के लिए विशेष रचनात्मक सत्रों का आयोजन किया गया।इन सत्रों का संचालन डॉ. सरोज वाइकार एवं डॉ. दीपक एल. वाइकार ने किया। दोनों विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को परियोजना-आधारित (Project-Based) एवं समस्या-आधारित (Problem-Based) शिक्षण की अवधारणा, उसके सिद्धांतों तथा वर्तमान शैक्षणिक परिदृश्य में उसकी आवश्यकता और प्रासंगिकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।विशेषज्ञों ने बताया कि आज के तकनीकी युग में छात्रों में स्वतंत्र चिंतन, नवाचार, और समस्या समाधान जैसे कौशल विकसित करने के लिए इन शिक्षण विधाओं को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। यह शिक्षण पद्धति न केवल छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करती है, बल्कि उन्हें जीवनोपयोगी कौशल (life skills) से भी सुसज्जित करती है। संयुक्त अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी विकास कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित सत्र को इंटरएक्टिव बनाने के उद्देश्य से प्रतिभागियों को समूह कार्य सौंपे गए। सत्र में विशेषज्ञों द्वारा डीप लर्निंग, क्रिटिकल थिंकिंग तथा स्मरण शक्ति में सुधार (Improved Retention) के विषय में संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त, सॉफ्ट स्किल्स के विकास और उन्हें दैनिक शैक्षणिक एवं पेशेवर कार्यों में किस प्रकार प्रभावी रूप से प्रयोग किया जा सकता है, इस पर भी उपयोगी चर्चा हुई। चर्चा के दौरान निम्नलिखित प्रमुख बिंदु सामने आए: समस्या-आधारित शिक्षण (Problem-Based Learning) छात्रों में स्वतंत्र सोच और समस्या-समाधान कौशल को विकसित करता है। परियोजना-आधारित शिक्षण (Project-Based Learning) से छात्रों को वास्तविक जीवन की समस्याओं पर कार्य करने का अनुभव प्राप्त होता है। यह विधा सक्रिय सहभागिता, टीमवर्क, और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देती है। सीखने की प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक, रुचिकर और स्थायी बनाती है। इंजीनियरिंग और तकनीकी पाठ्यक्रमों में इन विधाओं का समावेश छात्रों को उद्योगों की अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार करता है। यह दृष्टिकोण सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुप्रयोग से जोड़ने में सहायक है। NEP 2020 इन दोनों शिक्षण विधियों को अपनाने पर जोर देती है, जिससे शिक्षा पुस्तक केंद्रित न रहकर जीवन केंद्रित बन सके। ये विधियाँ छात्रों में संकट समाधान क्षमता, आत्मविश्वास और सीखने की रुचि को बढ़ावा देती हैं, जो 21वीं सदी के कौशल (21st Century Skills) के विकास में सहायक हैं। सत्र के दौरान वक्ताओं ने यह भी सुझाव दिया कि इन शिक्षण विधियों को पाठ्यक्रम के प्रारंभिक चरण से ही शामिल किया जाना चाहिए ताकि छात्रों की समग्र बौद्धिक एवं व्यावसायिक क्षमता का विकास हो सके। यह भी उल्लेख किया गया कि NEP 2020 के अंतर्गत उच्च शिक्षा संस्थानों को लचीलापन, बहु-विषयक दृष्टिकोण, और प्रभावी मूल्यांकन की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिसमें PBL और PrBL जैसी शिक्षण विधियाँ अहम भूमिका निभाती हैं। प्रतिभागियों ने सत्र में सक्रिय रूप से भाग लेकर विषयों की गहराई को समझा और अपने विचार साझा किए।

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