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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर को बड़ी उपलब्‍धि, एआई आधारित शोध के लिए मिली मंजूरी  

लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर को महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रितेश मौर्य और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्वेत केतु द्वारा एम्स, गोरखपुर, एम्स, नई दिल्ली, तथा आईआईआईटी दिल्ली के साथ संयुक्त रूप से विकसित अनुसंधान परियोजना “ कॉम्प्रिहेंसिव ए आई ड्रिवन रिस्क डिटेक्शन एंड इंटीग्रेटेड एनालिसिस फॉर एडवांस्ड कार्डियोवैस्कुलर केयर (Comprehensive AI-driven Risk Detection and Integrated Analysis for Advanced Cardiovascular Care) को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आई सी एम आर), नई दिल्ली द्वारा Extramural Small Grant योजना के अंतर्गत स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग ₹2 करोड़ है और इसे करीब तीन वर्षों में पूरा करने की योजना है। शोध परियोजना पूर्ण होने पर हार्ट फेल्यर की समय से और सटीक पहचान संभव होगी। इस परियोजना का उद्देश्य है कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) की मदद से एक ऐसी नई तकनीक बनाना जो हार्ट फेल्योर (हृदय की विफलता) के खतरे को पहले ही पहचान सके। जब किसी व्यक्ति का दिल धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है, तो यह तकनीक दिल की धड़कनों, ईसीजी और रक्त जांच से मिले संकेतों को समझकर डॉक्टरों को पहले ही चेतावनी दे सकेगी। इससे इलाज समय रहते शुरू किया जा सकेगा और मरीज को गंभीर स्थिति में पहुँचने से रोका जा सकेगा। इस अध्ययन में देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों जैसे कि एम्स गोरखपुर, और एम्स दिल्ली से लगभग 1600 से 1800 हार्ट फेल्यर मरीजों का स्वास्थ्य डेटा एकत्र किया जाएगा। इन मरीजों के दिल की धड़कनों, ईसीजी और रक्त जांच से मिले आंकड़ों का अध्ययन किया जाएगा। एमएमएमयूटी की एआई टीम इन आंकड़ों का विश्लेषण कर एक स्मार्ट एआई सिस्टम तैयार करेगी जो डॉक्टरों को यह समझने में मदद करेगा कि किन मरीजों में दिल की विफलता का खतरा अधिक है। यह प्रणाली समय से पहले चेतावनी देने में सक्षम होगी, जिससे कई लोगों की जान बचाई जा सकेगी।। एमएमएमयूटी के डॉ रितेश मौर्य एवं डॉ श्वेतकेतु ने बताया कि यह परियोजना भारत में हार्ट फेल्यर की प्रारंभिक पहचान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित शोध की दिशा में नए आयाम स्थापित करेगी। यह तकनीक बड़े पैमाने पर एकीकृत क्लिनिकल और बायोलॉजिकल डेटा से सीखकर हृदय की कमजोरी के शुरुआती संकेतों को पहचान सकेगी। इससे डॉक्टरों को समय रहते उपचार शुरू करने में मदद मिलेगी और विशेष रूप से ग्रामीण व सीमित संसाधन वाले क्षेत्रों में सस्ती, सटीक और सुलभ हृदय स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा सकेंगी। एमएमएमयूटी के माननीय कुलपति प्रो जे पी सैनी ने विश्वविद्यालय की शोध टीम को बधाई देते हुए कहा कि “यह हमारे विश्वविद्यालय के लिए गर्व का क्षण है कि एमएमएमयूटी को देश के शीर्ष संस्थानों एम्स गोरखपुर, एम्स नई दिल्ली, और आई आई टी दिल्ली के साथ मिलकर इस राष्ट्रीय महत्व की परियोजना का हिस्सा बनने का अवसर मिला है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमता, नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”

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