लखनऊ। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म शताब्दी एवं अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल जी के बलिदान दिवस के अवसर मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर द्वारा गुरु कृपा संस्थान, गोरखपुर एवं भारतीय शिक्षण मंडल, गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के बहुउद्देशीय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में संरक्षक के रूप में माननीय कुलपति प्रो जय प्रकाश सैनी उपस्थित रहे जबकि कवि सम्मेलन की अध्यक्षता राष्ट्रीय कवि संगम के अध्यक्ष जगदीश मित्तल जी ने की। कार्यक्रम की शुरुआत नोएडा से आयीं कवयित्री सुश्री प्रियंका राय जी द्वारा माँ शारदा की वंदना से की गई, जिससे संपूर्ण सभागार भक्तिरस एवं साहित्यिक चेतना से सराबोर हो गया। कार्यक्रम में ओरछा से आये सुमित मिश्र, बाराबंकी से आये शिवकुमार व्यास, नोएडा से आये रोहित चौधरी एवं प्रियंका राय, बस्ती से आये राजेश मिश्र तथा हरदोई से आये मृत्युंजय देव शुक्ल ने काव्य पाठ किया। मृत्युंजय देव शुक्ल ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति में वीर रस से ओतप्रोत काव्य रचना को अत्यंत सशक्त एवं भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने विशेष सराहना के साथ ग्रहण किया। रोहित चौधरी ने जटायु के साहस एवं संवेदना पर आधारित मर्मस्पर्शी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा—
“माना अपनी करनी पर ये नीच नहीं शर्मिंदा है,
पर पुत्री निश्चिंत रहो तुम, अभी जटायु ज़िंदा है।”
सुमित मिश्र ने अपनी प्रसिद्ध कविता की पंक्तियां सुनाते हुए कहा “चल सकूँ उसी पर जो रामजी का पथ है। आपके स्नेह की मुझ को यही शपथ है” इस काव्य प्रस्तुति ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. बी. के. पांडे एवं डॉ. मिलिंद राज आनंद द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। इस राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में उत्तर मध्य भारत के विभिन्न जनपदों से पधारे कवियों ने देशभक्ति, सामाजिक चेतना, राष्ट्र निर्माण एवं युवा प्रेरणा से ओतप्रोत कविताओं का प्रभावशाली पाठ किया। कवियों की रचनाओं ने उपस्थित युवाओं एवं विद्यार्थियों को विशेष रूप से प्रेरित एवं प्रोत्साहित किया। कवि सम्मेलन के अंत में माननीय कुलपति महोदय ने कवियों को शॉल एवं स्मृतिचिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया।
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