गाजीपुर: आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज, अयोध्या के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र अंIकुशपुर, गाजीपुर के द्वारा अनुसूचित जाति परियोजना के तहत रोजगार परक प्रशिक्षण में 25 कृषक एवं कृषक महिलाओं को जैविक खाद उत्पादन तकनीक के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया, जिसमें गोबर की खाद ,नाडेप कम्पोस्ट , केंचुआ खाद ,हरी खाद , जीवामृत , बीजामृत ,घनजीवामृत, वास्पा एवं आच्छादन आदि घटक शामिल है I डॉ0 दीपक प्रजापति (मृदा वैज्ञानिक) ने किसानों को केंचुआ खाद, नाडेप कम्पोस्ट जीवामृत का निर्माण तकनीक के बारे में बताते हुए इनको मिट्टी में मिलाने से होने वाले लाभ के बारे में बिस्तार से बताया और उनको अवगत भी कराया कि रबी की फसलें जैसे -गेहूँ , सरसों, चना , मटर एवं मसूर पर निरन्तर अन्तराल पर जीवामृत का छिड़काव करने से कीटों का प्रकोप कम हो जाता है I घनजीवामृत को मिटटी में मिलाने से जैविक कार्बन की मात्रा में बढोत्तरी होती है, जिसमें सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ जाती है I डॉ ए0 के0 सिंह ( पशुपालन वैज्ञानिक ) ने जैविक खेती में पशुओं के योगदान को बताया I डॉ जे. पी. सिंह (अध्यक्ष, के. वी. के.) ने बताया कि जैविक खेती और जैविक उत्पाद जैसे -जैविक सब्जियाँ ,जैविक दालें ,जैविक अनाज की प्रमाणिकता कराने की विधि विस्तार से बताया साथ ही साथ आग्रह भी किया कि प्रत्येक किसान अपने परिवार के स्वास्थ्य हेतु अपने भूमि के छोटे से भाग पर मानव एवं पर्यावरण सुरक्षा हेतु जैविक खेती करें I डॉ0 शशांक सिंह (उद्यान वैज्ञानिक), केंचुआ खाद और नाडेप कम्पोस्ट की उद्यानिकी फसलों में उपयोगिता को बताया I डॉ ‚ नरेंद्र प्रताप (पादप प्रजनन वैज्ञानिक) मोटे अनाज के उत्पादन करने के लिए किसानों से आग्रह किया I जैविक खेती का मानव स्वास्थ्य में महत्व और बीज शोधन करना क्यों आवश्यक है I किसानो के खेती के दौरान आने वाली समस्याओं का विस्तार से निदान भी बताया I प्रशिक्षण में कृषक केदार मास्टर, रामऔतार, ओमप्रकाश, मनीष कुमार ,विनोद कुमार, दिलीप कुमार , दूधनाथ , रिंकू ,लालजी एवं कृषक महिलायें जीरा,ज्योति देवी, गीता देवी एवं पूनम देवी आदि ने प्रतिभाग किया I
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