लखनऊ। मदन मोहन मालवी मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी), गोरखपुर और बिएजेल ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के बीच य प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी), गोरखपुर और बिएजेल ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के बीच हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह एमओयू ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से संपन्न हुआ है, जो भारत की स्वच्छ ऊर्जा क्रांति में एक नया अध्याय जोड़ता है। यह समझौता 12 जनवरी 2026 को एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. जेपी सैनी की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। एमओयू पर एमएमएमयूटी की ओर से प्रो. जय प्रकाश (अधिष्ठाता, एमएमएमयूटी गोरखपुर) ने हस्ताक्षर किए, जबकि बिएजेल ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दो निदेशक, श्री नीरज मिश्रा (सीईओ, बिएजेल ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड) और श्री करण द्वारा हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्रमुख, शिक्षक और छात्र उपस्थित थे, जिन्होंने इस सहयोग को हरी ऊर्जा के भविष्य के रूप में सराहा। इस एमओयू के तहत दोनों संस्थाएं हरी ऊर्जा और हरी हाइड्रोजन के क्षेत्र में तकनीकी और अनुसंधान सहयोग करेंगी। विशेष रूप से, एमएमएमयूटी के इंजीनियरिंग विभाग हरी हाइड्रोजन उत्पादन की प्रक्रियाओं में नवीनतम तकनीकों का विकास करेंगे, जबकि बिएजेल ग्रीन एनर्जी उद्योग स्तर पर इन तकनीकों को लागू करने में सहायता प्रदान करेगी। सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं: इलेक्ट्रोलाइजर तकनीक का विकास, हरी ऊर्जा स्रोतों से हाइड्रोजन उत्पादन, पर्यावरण अनुकूल प्रक्रियाओं का अनुसंधान, और छात्रों के लिए इंटर्नशिप एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम। इसके अलावा, संयुक्त कार्यशालाएं, सेमिनार और परियोजनाएं आयोजित की जाएंगी, जो युवा इंजीनियरों को उद्योग की चुनौतियों से परिचित कराएंगी। एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने इस अवसर पर कहा, “यह एमओयू न केवल हमारे विश्वविद्यालय के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि भारत की नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य की ऊर्जा है, और इस सहयोग से हम स्थानीय स्तर पर वैश्विक मानकों की तकनीक विकसित कर सकेंगे।” वहीं, बिएजेल ग्रीन एनर्जी के सीईओ श्री नीरज मिश्रा ने जोड़ा, “एमएमएमयूटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के साथ मिलकर काम करना हमारे लिए गर्व की बात है। हम साथ मिलकर हरी ऊर्जा को सस्ता और सुलभ बनाने की दिशा में प्रयास करेंगे, जो जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में सहायक होगा।” यह एमओयू भारत सरकार की नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है, जो 2030 तक 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखता है। इस सहयोग से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
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