लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी), गोरखपुर के अटल भवन स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी एंड सस्टेनेबल सॉल्यूशंस’ (जीटीएसएस-2026) का भव्य समापन समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग (सीएसई), इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (ईई) तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ईसीई) विभागों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन ने देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं तथा उद्योग विशेषज्ञों को हरित प्रौद्योगिकी एवं सतत विकास के क्षेत्र में गहन ज्ञान-विनिमय एवं विचार-मंथन का सशक्त मंच प्रदान किया।सम्मेलन में कुल 993 शोध-पत्र प्राप्त हुए, जिनमें 18 विदेशी शोध-पत्र विभिन्न देशों से शामिल थे। कठोर समीक्षा प्रक्रिया के उपरांत 211 शोध-पत्रों को स्वीकृत किया गया तथा सभी 211 स्वीकृत शोध-पत्रों के लिए पंजीकरण पूर्ण हुआ। सम्मेलन में कुल 483 समीक्षकों ने योगदान दिया, जिनके विशेषज्ञ मूल्यांकन ने शोध गुणवत्ता को सुनिश्चित किया।दो दिवसीय कार्यक्रम में कुल 42 तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 36 सामान्य सत्र, 4 विमेन इन इंजीनियरिंग (डब्ल्यूआईई) सत्र तथा 2 यंग प्रोफेशनल्स (वाईपी) सत्र शामिल थे। इन सत्रों में कुल 211 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए, जिसमें सामान्य सत्रों में 178, डब्ल्यूआईई सत्रों में 21 तथा वाईपी सत्रों में 12 शोध-पत्र शामिल रहे। प्रथम दिवस (19 फरवरी) पर 151 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए, जबकि द्वितीय दिवस (20 फरवरी) पर 60 शोध-पत्र प्रस्तुत हुए। विभिन्न सत्रों में स्वच्छ ऊर्जा, हरित संचार प्रणाली, स्मार्ट ग्रिड, एआई-आधारित सतत मॉडल तथा ऊर्जा दक्ष प्रणालियों जैसे समसामयिक एवं महत्वपूर्ण विषयों पर गहन एवं उपयोगी चर्चा हुई।समापन सत्र का स्वागत उद्बोधन प्रो. राकेश कुमार, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग तथा सम्मेलन के जनरल चेयर ने प्रस्तुत किया। उन्होंने सम्मेलन की प्रासंगिकता रेखांकित करते हुए बहु-विषयी सहयोग, नवाचार-उन्मुख शोध तथा सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में अकादमिक-उद्योग साझेदारी की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।समापन समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. कुलदीप सहाय, निदेशक, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, बस्ती की उपस्थिति रही। अपने प्रेरक संबोधन में उन्होंने कहा कि हरित एवं सतत प्रौद्योगिकियाँ आधुनिक विकास की मूल धुरी हैं। अकादमिक जगत को उद्योग के साथ मिलकर ऐसे व्यावहारिक एवं समाजोपयोगी समाधान विकसित करने चाहिए जो पर्यावरण संरक्षण एवं ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करें। उन्होंने आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए युवा शोधकर्ताओं को नवाचार की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने का आह्वान किया।इस अवसर पर कुलपति प्रो. जे. पी. सैनी ने विश्वविद्यालय-उद्योग सहभागिता को और सुदृढ़ करने तथा सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप अनुसंधान को गति प्रदान करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ज्ञान-साझेदारी, वैश्विक सहयोग तथा नवीनतम तकनीकी प्रगति को नई दिशा प्रदान करते हैं, जो भारत को हरित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर करने में सहायक सिद्ध होंगे।सम्मेलन के सफल आयोजन एवं क्रियान्वयन में आयोजन समिति के प्रमुख सदस्यों—प्रो. (डॉ.) प्रभाकर तिवारी, डॉ. राजन मिश्रा तथा डॉ. सत्य प्रकाश यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने समस्त तकनीकी एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का कुशल संचालन सुनिश्चित किया।अंत में सम्मेलन चेयर/कन्वीनर डॉ. सत्य प्रकाश यादव ने सभी विशिष्ट अतिथियों, कीनोट वक्ताओं, शोध-पत्र प्रस्तुतकर्ताओं, समीक्षकों, प्रतिभागियों तथा सहयोगी टीम के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। जीटीएसएस-2026 ज्ञान-विस्तार, नवाचार तथा वैश्विक सहभागिता की दिशा में एक प्रभावी एवं सार्थक पहल सिद्ध हुआ है। यह सम्मेलन हरित एवं सतत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने तथा भावी शोध दिशाओं को निर्धारित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।
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