गाजीपुर। विधिक जागरूकता पर आधारित संस्था बी-लीगल के तत्वावधान में आज शुक्रवार को एक सेमिनार का आयोजन गाजीपुर के कठवामोड़ क्षेत्र स्थित R.N.K. गर्ल्स इंटर कॉलेज में किया गया। विधिक जागरूकता सेमिनार में बी-लीगल के आमंत्रित अधिवक्ताओं का सर्वप्रथम विद्यालय प्रबंधन ने माल्यार्पण कर स्वागत किया तत्पश्चात सेमिनार का आरंभ करते हुए वक्ताओं ने विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण संवैधानिक जानकारियां प्रदान की। अधिवक्ता रबनवाज सिद्दीकी ने संविधान की व्याख्या करते हुए बताया कि संविधान दो शब्दों से बना है जिसमें “सम” का अर्थ है बराबर तथा “विधान” का तात्पर्य नियम और कानून से है। इस प्रकार जो नियम सभी के लिए बराबर या समान हो संविधान कहलाता है। साथ ही संविधान किसी भी देश का मौलिक कानून है जो सरकार के विभिन्न अंगों की रुपरेखा और मुख्य कार्य का निर्धारण करता है। वहीं अधिवक्ता धनंजय सिंह ने बताया कि संविधान लागू होते वक्त जहां 395 अनुच्छेद, 22 भाग तथा 8 अनुसूचियां थी वहीं संशोधनों के आधार पर वर्तमान में 465 अनुच्छेद, 25 भाग तथा 12 अनूसूचियां है। अधिवक्ता चंद्र मोहन सिंह जी ने मौलिक अधिकारों एवं कर्तव्यों की बिंदुवार व्याख्या की। इस दौरान बी-लीगल के प्रमुख सहयोगी एवं MJRP डिग्री कॉलेज मुहम्मदाबाद के प्रवक्ता आनंद कुशवाहा ने संविधान के महत्व पर प्रकाश डाला। सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में अधिवक्ता राकेश कुमार ने आर्टिकल 32 को स्पष्ट करते हुए कहा कि आर्टिकल 32 मौलिक अधिकारों का एक महत्वपूर्ण अंग है एवं संवैधानिक उपचारों का अधिकार है इसकी सबसे बड़ी शक्ति यह है कि ये नागरिकों को उनके मौलिक अधिकारों का हनन होने पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार प्रदान करता है संविधान के प्रमुख स्तंभ डॉ भीमराव अंबेडकर ने इसे संविधान की आत्मा और हृदय के रूप में संबोधित किया है। आर्टिकल 32 न्यायालय को अधिकारों की रक्षा के लिए पांच प्रकार की रिट जारी करने की शक्ति भी प्रदान करता है किंतु इसका उपयोग अपील के लिए नहीं किया जा सकता, यह केवल अधिकारों के हनन पर लागू होता है। अधिवक्ता ने बताया कि आर्टिकल 32 के निलंबन का संवैधानिक आधार संविधान के अनुच्छेद 359 के अंतर्गत राष्ट्रपति को प्राप्त है जिससे राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के दौरान किसी भी मौलिक अधिकार को सर्वोच्च न्यायालय में लागू कराने के लिए याचिका दायर करने के अधिकार को निलंबित कर सकते हैं। सेमिनार के प्रश्नोत्तरी सत्र में विद्यार्थियों से लीगल अवेयरनेस सेमिनार से संबंधित विभिन्न प्रश्न किए गए जिनका उत्तर विद्यार्थियों ने बड़ी बेबाकी से दिया। इस दौरान विधि सम्मत उत्तर के आधार पर विद्यार्थियों में से लिस्नर ऑफ द डे का चयन किया गया। लिस्नर ऑफ द डे के रूप में चयनित कक्षा 9th की छात्रा प्रीति यादव को संविधान की एक प्रति भेंट की गई। सेमिनार के सफलता पूर्वक सम्पन्न होने पर संस्थान के डायरेक्टर श्री रामानुज सिंह कुशवाहा ने उपस्थित अधिवक्तागण एवं बी-लीगल टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विधिक जागरूकता के रुप में इस प्रकार के कार्यक्रमों से विद्यार्थियों में संविधान के प्रति और भी रुचि बढ़ेगी जिससे सशक्तिकरण का मार्ग और भी प्रशस्त होगा। इस दौरान काफी संख्या में छात्राएं सहित अध्यापकगण एवं अध्यापिकाएं उपस्थित रहीं। सेमिनार का संचालन BE LEGAL के CO-ORDINATOR डीके विश्वा ने की।
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