गाजीपुर। मुख्य विकास अधिकारी आलोक प्रसाद गाजीपुर की अध्यक्षता में उर्वरक की उपलब्धता व वितरण की समीक्षा की गयी, जिसमें जिला कृषि अधिकारी, सहायक आयुक्त स सहायक निबन्धक सहकारिता, जिला प्रबन्धक पी०सी०एफ० एवं इफको के एरिया मैनेजर ने प्रतिभाग किय गया। मुख्य विकास अधिकारी द्वारा उर्वरक विक्रेता निम्न निर्देशों का कड़ाई से पालन करने हेतु निर्देशित किया गया जिसमें उर्वरक के थोक विक्रेता से फुटकर उर्वरक विक्रेता तक उर्वरकों के एक्नालेजमेंट की व्यवस्था स्यित टाइम की जाए एवं उर्वरक के साथ अन्य उत्पादों की टैगिंग न की जाये, जिससे कृषकों को उर्वरत वितरण के साथ ही साथ डी०बी०टी० प्रणाली के अन्तर्गत वास्तविक क्रेता का नाम दर्ज हो सके एवं सह मूल्य पर उर्वरक प्राप्त हो सके। कृषकों को उनके जोत बही एवं उनकी आवश्यकता के अनुसार उनकी भूमि को ध्यान में रखते हुए फार्मर रजिस्ट्री के आधार पर ही उनको उर्वरक उपलब्ध कराया जाय एवं रेटबोर्ड, स्टाक बोर्ड अवश लगाये जाये। उन्होने बताया कि उर्वरक विक्रेता वर्तमान में प्रयोग होने वाली मुख्य उर्वरक यूरिया की बिक्री कृषकों को निर्धारित मूल पर अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करे, यदि कोई उर्वरक विक्रेता अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक मूल्य प उर्वरक यथा यूरिया के साथ कम प्रचलित अन्य उत्पाद खरीदने हेतु बाध्य करते है तो, सम्बन्धित उर्वरू विक्रेताओं के विरूद्ध रासुका की कार्यवाही सम्पादित की जाये। उर्वरक के अवैध उपयोग व उर्वरक के गैर कानूनी डायवर्जन पर कड़ी निगरानी रखी जाये एवं दोष उर्वरक विक्रेता के विरूद्ध आवश्यक कार्यवाही सम्पादित की जाये। जनपद गाजीपुर के पांच विकासखंड जमानिया, रेवतीपुर, भदौरा, मोहम्मदाबाद तथा भांवरकोल व सीमाएं बिहार प्रांत के जनपदों से लगे होने के कारण उर्वरको की कालाबाजारी और अवैध परिसंचालन व रोकने की दृष्टिगत भी इन क्षेत्रों में सचल दल का गठन जिलाधिकारी महोदय द्वारा किया गया है, जिस कृषि विभाग, पुलिस विभाग व प्रशासनिक विभाग द्वारा भ्रमण करते हुए उर्वरक के आवागमन पर निगा रखेगे। कृषक भाईयों से अपील किया है कि जनपद में उर्वरक की कोई कमी नहीं है। आ लोगो से अनुरोध है कि उर्वरक क्रय हेतु अपनी फार्मर रजिस्ट्री कराने के उपरान्त जाये और आवश्यकता के अनुरूप ही उर्वरक का क्रय करे।
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