गाजीपुर। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज, अयोध्या के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र अंIकुशपुर, गाजीपुर-11 के द्वारा कृषक एवं कृषक महिलाओं के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आज संपन्न हुआ 1 कार्यक्रम में केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. राम गोपाल यादव, कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए. के. सिंह , डॉ. नरेंद्र प्रताप, डॉ. शशांक सिंह, डॉ. दीपक प्रजापति, डॉ पंकज कुमार ने किसानों को खरीफ फसलों में एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दिया 1 कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को अवगत कराया कि केवल रासायनिक खादों के भरोसे रहने के बजाय जैविक खाद और जैविक-उर्वरकों का संतुलित प्रयोग करके किसान न सिर्फ अपनी लागत कम कर सकते हैं, बल्कि पैदावार में भी भारी बढ़ोतरी देख सकते हैं।खरीफ की मुख्य फसलें जैसे धान, मक्का, सोयाबीन, बाजरा और कपास से बंपर पैदावार लेने के लिए 17 पोषक तत्व का 4 R के सिद्धांत जैसे सही स्रोत, सही समय, सही मात्रा और सही स्थान पर ऊर्वरकों का प्रयोग एवं पोषक तत्व प्रबंधन की संपूर्ण जानकारी दी गई 1 इससे खेत में जरूरत से ज्यादा खाद डालने का खर्च बचेगा और मिट्टी की सेहत भी खराब नहीं होगी। फसलों में मुख्य रूप से नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P) और पोटाश (K) की सही अनुपात में प्रयोग करने की आवश्यकता है।धान और मक्का जैसे फसलों को मुख्य रूप से 120:60:40 या 100:50:40 ( किग्रा प्रति हेक्टेयर ) के अनुपात में NPK की आवश्यकता होती है। तिलहन और दलहन (सोयाबीन, मूंग, अरहर) इन फसलों में नाइट्रोजन की कम और फॉस्फोरस तथा सल्फर की ज्यादा जरूरत होती है। इनके लिए 20:60:40 (किग्रा प्रति हेक्टेयर) के अनुपात में NPK की अनुपात बेहतर माना जाता है।आजकल भारतीय मिट्टी में जिंक (Zn) और सल्फर (S) की भारी कमी देखी जा रही है। जिंक सल्फेट धान और मक्के की फसल में 25 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से जिंक सल्फेट डालें। यदि खड़ी फसल में पत्तियां पीली पड़ रही हैं, तो 0.5% जिंक सल्फेट का छिड़काव करें। कार्यक्रम में प्रगतिशील कृषक केदारनाथ, सुरेंद्र एवं बुधिया देवी प्रेमा देवी, जीरा ,नीतू आदि कृषक महिलाओं ने प्रतिभाग किया।

Purvanchal News जोड़े आपको पूर्वांचल से….