लखनऊ। मातृ- शिशु मृत्यु दर पर लगाम लगाने और संस्थागत एवं सुरक्षित प्रसव व्यवस्था को जन जन तक पहुंचाने के लिए एरा लखनऊ मेडिकल कॉलेज की एराज शिशु मां सुरक्षा (एसएमएस) योजना का शनिवार को औपचारिक शुभारंभ हुआ। एरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अब्बास अली मेहदी ने योजना का उद्घाटन किया। इस योजना का मकसद खासतौर पर गरीब और असहाय वर्ग की महिलाओं को संस्थागत एवं सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल की तरफ आकर्षित करना है ताकि नारी शक्ति के साथ साथ देश का भविष्य भी सुरक्षित रहे। गौरतलब है कि एराज शिशु मां सुरक्षा (एसएमएस) योजना के तहत नार्मल डिलीवरी के साथ साथ अब सिजेरियन डिलीवरी भी निशुल्क की जाएगी। प्रसव के समय मातृ एवं शिशु की दवा, जांच और खानपान भी मुफ्त होगा। अस्पताल से छुट्टी के समय मां और बच्चे को एरा मेडिकल कालेज की तरफ से 2500 रुपये की आर्थिक सहायता तथा बेबी केयर किट दिया जाएगा। बेबी किट में बच्चे के पालन-पोषण से संबंधित आवश्यक सामग्री होगी। इस मौके पर एरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अब्बास अली मेहदी ने कहा कि हमारा मकसद सभी को गुणात्मक चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराना है। हम सेवा भाव से कार्य करते हैं। कोरोना कालखंड इसका उदाहरण है। जैसा की सभी जानते है कि देश में मातृ- शिशु मृत्यु दर में कमी लाना एक बड़ी चुनौती है। केंद्र और प्रदेश सरकार लगातार इस दिशा में प्रयासरत है। अभी कुछ दिन पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में और कमी लाने के लिए संस्थागत एवं सुरक्षित प्रसव व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया था। उन्होंने कहा कि हर गर्भवती महिला तक समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा पहुंचाना चाहिए। एरा मेडिकल कालेज पहले से ही बेहतर और निशुल्क चिकित्सा सेवा उपलब्ध करा रहा है। मुख्य रूप से गरीब वर्ग के लिए हमारे सभी दरवाजे खुले हैं। उन्होंने कहा कि आमतौर पर निजी अस्पतालों की नजर लोगों की जेब पर होती है, लेकिन हमारी योजनाएं गरीबों पर केंद्रित होती है। ऐरा मेडिकल कॉलेज मे नॉर्मल डिलीवरी पहले से ही फ्री थी अब सिजेरियन डिलीवरी को भी निशुल्क कर दिया गया है। इसके साथ ही दोनों तरह की डिलिवरी में महिला और शिशु की सभी जांच, दवाई, अस्पताल का खर्च,खानपान और डॉक्टरों का खर्च सबकुछ निशुल्क रहेगा। अस्पताल से छुट्टी के बाद दोनों तरह की डिलेवरी में महिलाओं को 2500 रुपया नगद और बेबी किट अस्पताल की तरफ से दिया जायेगा, ताकि घर पहुंचने पर भी मां और बच्चे को किसी तरह की दिक्कत न हो। यह योजना जहां गरीब वर्ग को अस्पतालों के भरी भरकम खर्च से मुक्त करेगी, वहीं मातृ-शिशु को सुरक्षा की गारंटी प्रदान करेगी। उन्होंने बताया कि यह योजना सुरक्षित प्रसव को प्रोत्साहित करके मातृ एवं शिशु की मृत्यु दर में कमी लाने और गरीब वर्ग को बेहतर उपचार देने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसका लाभ गरीब और मध्यम सहित सभी वर्ग के परिवारों को प्राप्त होगा। इसके लिए किसी सरकारी योजना का लाभार्थी होना भी जरुरी नहीं है। कोई भी इसका लाभ प्राप्त कर सकता है। उन्होंने बताया कि देश को आजाद होने के बाद से मातृ- शिशु मृत्यु दर में काफी कमी दर्ज की गई है, लेकिन अभी भी ये बड़ी चुनौती है। मातृ- शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम करने के लिए सरकार की कई योजनाएं है। एरा भी एसएमएस योजना के माध्यम से सरकार के अभियान का हिस्सा बना है। हम तकनीक, ट्रेनिंग, पेशेंट केयर और रिसर्च की क्वालिटी से किसी भी तरह का समझौता नहीं करते है। यही वजह है कि एरा आज बेहतर चिकित्सीय सेवा के लिए जाना जाता है। इस मौके पर एरा विश्वविद्यालय उपकुलपति डॉक्टर फरजाना मेंहदी ने कहा कि एरा मेडिकल कॉलेज लम्बे समय से गरीब और असहाय वर्ग के साथ खड़ा है। यह विशेष योजना मातृशक्ति के लिए है ताकि वो सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पतालों के प्रति आकर्षित हो। हम मरीजों के उपचार को सेवा भाव से देखते है।एरा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर जमाल मसूद ने कहा कि एरा पहला ऐसा निजी संस्थान है जिसने इस तरह की योजना लागू की है। यह योजना किसी एक विभाग की नहीं बल्कि सबका प्रोग्राम है। डीन डॉक्टर एमएमए फरीदी ने कहा कि आज दोहरी खुशी का दिन है, एक तरफ भारत सरकार ने एनएफएचएस-6 के सुधार वाले आंकड़े जारी किए है वही एरा ने एसएमएस योजना लागू की है। एनएफएचएस-6 के आंकड़ों के मुताबिक अस्पतालों में डिलीवरी की दर 85 प्रतिशत से बढ़ कर 90 प्रतिशत हो गई है और एक बच्चा पैदा होने के एक घंटे के अंदर मां द्वारा बच्चे को अपना दूध पिलाने की दर 41 से बढ़कर 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है। ऐसे में एराज शिशु मां सुरक्षा (एसएमएस) योजना इन आंकड़ों को और बेहतर करने में मददगार साबित होगी। एरा लखनऊ मेडिकल कॉलेज के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रमुख डॉक्टर एसपी जयसवार ने कहा कि यह योजना मुख्य रूप वर्ग के लिए है जो अस्पतालों का भरी भरकम खर्च नहीं उठा सकते है। इससे मातृ- शिशु मृत्यु दर में निश्चित रूप से गिरावट दर्ज होगी। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ब्रिगेडियर सुराजित बासु ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में डॉक्टर, फैकल्टी सदस्य और छात्र मौजूद थे।
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