लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी), गोरखपुर के कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग स्थित साइबर फॉरेंसिक रिसर्च सेंटर द्वारा विश्वविद्यालय एवं गोरखपुर जोन पुलिस के मध्य हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अंतर्गत तथा साइंट टेक्नोलॉजीज़, नई दिल्ली के सहयोग से पुलिस अधिकारियों हेतु “साइबर फॉरेंसिक टूल्स” विषय पर एक सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम (द्वितीय बैच) दिनांक 01 जून से 05 जून 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा तथा मुथा अशोक जैन, पुलिस महानिरीक्षक, गोरखपुर जोन, गोरखपुर के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि अरुण कुमार एस., अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) तथा विशिष्ट अतिथि उपेन्द्र कुमार सिंह, साइबर कमांडो, गोरखपुर जोन पुलिस द्वारा किया गया। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि ने कहा कि बढ़ते साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस अधिकारियों की तकनीकी दक्षता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मोबाइल, डिस्क, क्रिप्टोकरेंसी, वीडियो एवं ऑडियो फॉरेंसिक्स जैसी आधुनिक तकनीकें वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि एमएमएमयूटी का साइबर फॉरेंसिक रिसर्च सेंटर पुलिस अधिकारियों को जटिल साइबर अपराधों की प्रभावी जांच हेतु आवश्यक तकनीकी सहायता एवं प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस अधिकारियों की जांच क्षमता एवं तकनीकी कौशल को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। कार्यक्रम में बहराइच, संत कबीर नगर, बस्ती, गोंडा, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर एवं श्रावस्ती जनपदों से कुल 24 पुलिस अधिकारी प्रतिभाग कर रहे हैं। विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऑनलाइन ठगी, सोशल मीडिया फ्रॉड, साइबर स्टॉकिंग एवं पहचान चोरी जैसे बढ़ते साइबर अपराध कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समक्ष गंभीर चुनौती बन चुके हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का साइबर फॉरेंसिक रिसर्च सेंटर अत्याधुनिक उपकरणों एवं तकनीकों से सुसज्जित है, जो डिजिटल अपराधों की त्वरित, सटीक एवं वैज्ञानिक जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने साइबर फॉरेंसिक्स में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की बढ़ती उपयोगिता एवं संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. बी. के. शर्मा एवं डॉ. विमल कुमार ने कार्यक्रम का परिचय देते हुए बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मोबाइल, कंप्यूटर एवं नेटवर्क फॉरेंसिक्स, मल्टीमीडिया विश्लेषण, ड्रोन एवं वीडियो फॉरेंसिक्स, वॉयस एनालिटिक्स, स्टेगनोग्राफी, पासवर्ड रिकवरी तथा डिजिटल साक्ष्य विश्लेषण जैसी उन्नत तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत नवीन सिंह (साइंट टेक्नोलॉजीज़), डॉ. विमल कुमार एवं डॉ. बी. के. शर्मा संसाधन विशेषज्ञ के रूप में प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। अंत में डॉ. बी. के. शर्मा ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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