लखनऊ। इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी के स्नातकों की उच्चतर अध्ययन में लगातार घटती रुचि को ध्यान में रखते हुए मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी ने महत्पूर्ण पहल की है। शैक्षणिक सत्र 2025 – 26 से एम टेक की फीस कम करने का निर्णय लिया गया है। एम टेक की फीस कम करने के प्रस्ताव को माननीय कुलपति प्रो जे पी सैनी की अध्यक्षता में संपन्न हुई विद्या परिषद् की 38वीं बैठक में मंजूरी मिल गई है। प्रस्ताव को वित्त समिति की आगामी बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। वित्त समिति की मंजूरी के बाद शैक्षणिक सत्र 2025-26 से घटी हुई दरें लागू हो जाएंगी। इससे छात्रों के लिए एम टेक की पढ़ाई सस्ती हो जाएगी। बीते कई वर्षों से एम टेक पाठ्यक्रमों में टेक्निकल ग्रेजुएट्स का रुझान कम हुआ है। इसके कारण अच्छे शोध छात्र मिलने में अधिकांश तकनीकी विश्वविद्यालयों को कठिनाई हो रही थी क्योंकि अधिकांश विश्वविद्यालयों में एम टेक के बाद ही पी एच डी में प्रवेश मिलता है। इस को ध्यान रखते हुए एम टेक प्रवेश में आ रही कठिनाइयों पर विचार कर उसका निवारण करने के लिए एम एम एम यू टी ने तीन सदस्यीय समिति गठित की थी जिसमें प्रो जीउत सिंह, प्रो वी के द्विवेदी, एवं प्रो प्रभाकर तिवारी सम्मिलित थे। समिति ने विचार विमर्श के दौरान यह पाया कि ठीक ठाक संख्या में इंजीनियरिंग स्नातकों को भी टेक के आधार पर ही नौकरी मिल जाती है। जो छात्र उच्च अध्ययन करना चाहते हैं उनमें भी कई प्रबंधन विषयों में दाखिला ले लेते हैं। जो कुछ छात्र इंजीनियरिंग में परास्नातक डिग्री पूरी भी करते हैं उन्हें अपनी परास्नातक डिग्री का कोई विशेष लाभ प्लेसमेंट में नहीं मिलता है। समिति ने यह भी पाया कि एम एम एम यू टी की एम टेक की फीस कई आई आई टी संस्थानों से भी बहुत ज्यादा है। इसको ध्यान में रखते हुए समिति ने फीस घटाने की संस्तुति की थी। पिछले वर्ष तक एम टेक का शिक्षण शुल्क ही रु. 60 हजार था और अन्य सभी मद मिलाकर कुल वार्षिक फीस छात्रावासियों के लिए रु. 1, 20,000/- थी जिसमें हॉस्टल एवं मेस फीस शामिल नहीं थी। इसी प्रकार, कैंपस के बाहर रहने वाले छात्रों के लिए कुल फीस रु. 1,22,500/- थी। नई शुल्क संरचना इस प्रकार है: –
प्रथम सेमेस्टर छात्रावासी के लिए (प्रति सेमेस्टर)
रु. 10000 शिक्षण शुल्क + रु. 5000 परीक्षा शुल्क + रु. 1000 यूजर चार्ज + रु. 1250 रिसर्च इनिशिएटिव चार्ज + रु. 1250 बस चार्ज + रु. 5000 कॉशन मनी = रु. 23500, हॉस्टल एवं मेस शुल्क अलग से
प्रथम सेमेस्टर कैंपस के बाहर रहने वाले छात्रों के लिए (प्रति सेमेस्टर)
रु. 10000 शिक्षण शुल्क + रु. 5000 परीक्षा शुल्क + रु. 1000 यूजर चार्ज + रु. 1250 रिसर्च इनिशिएटिव चार्ज + रु. 2500 बस चार्ज + रु. 5000 कॉशन मनी = रु. 24750
द्वितीय सेमेस्टर से छात्रावासियों के लिए रु. 18500 प्रति सेमेस्टर जबकि कैंपस के बाहर के छात्रों के लिए रु. 19750
इस प्रकार पहले से लगभग आधी फीस में ही विद्यार्थी एम टेक की पढ़ाई कर सकेगा। इस निर्णय से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले छात्रों की काफी राहत मिलेगी। इसी प्रकार, अच्छे विद्यार्थियों को शोध की दिशा में प्रवृत्त करने और विश्वविद्यालय के पी एच डी कार्यक्रम को और आकर्षक बनाने के लिए विश्वविद्यालय ने पी एच डी के छात्रों की फेलोशिप में बढ़ोत्तरी कर रु. 18000 प्रति माह करने का निर्णय भी लिया है। प्रस्ताव को विद्या परिषद् की मंजूरी मिल गई है और वित्त समिति की आगामी बैठक में प्रस्ताव स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। वित्त समिति की मंजूरी के बाद शैक्षणिक सत्र 2025-26 से सभी पी एच डी शोधार्थियों को बढ़ी हुई फेलोशिप मिलेगी। साथ ही फेलोशिप मिलने पर छात्र गंभीरतापूर्वक शोध करें इसलिए यह प्रावधान भी रखा गया है कि यह फेलोशिप तीन वर्ष तक मिलेगी और पी एच डी के चतुर्थ वर्ष में केवल उन्हीं विद्यार्थियों को फेलोशिप मिलेगी जिन्होंने एस सी आई/ एस सी आई ई/ एस एस सी आई में शामिल शोध पत्रिकाओं में कम से कम एक शोध पत्र प्रकाशित किए हों। इससे छात्र शोध प्रकाशन की दिशा में गंभीरतापूर्वक कार्य करेंगे। वर्ष 2023-24 तक पी एच डी के छात्रों को रु. 12500 प्रति माह की ही फेलोशिप मिलती थी, जिसे 2024-25 में बढ़ा कर रु. 15000 प्रति माह किया गया था। विश्वविद्यालय ने बिना किसी फीस में बढ़ोत्तरी किए ही आंतरिक स्तर पर फीस के विभिन्न मद में पुनः आवंटन कर फेलोशिप पर होने वाले व्यय की व्यवस्था कर ली है।
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