गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी), गोरखपुर के कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित पांचवें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘मशीन विजन एंड ऑगमेंटेड इंटेलिजेंस (एमएआई-2025)’ का उद्घाटन आज विश्वविद्यालय परिसर में भव्य समारोह के साथ संपन्न हुआ। यह सम्मेलन 20-21 दिसंबर 2025 तक हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी देखी गई। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य मशीन विजन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्मार्ट टेक्नोलॉजी और उन्नत इंटेलिजेंट सिस्टम्स के क्षेत्र में नवीनतम शोध और अनुप्रयोगों पर चर्चा करना है। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर अनिल कुमार त्रिपाठी, कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी उपस्थित रहे। सम्मेलन कुलपति प्रोफेसर जय प्रकाश सैनी के मुख्य संरक्षण एवं कुलसचिव श्री चंद्र प्रकाश प्रियदर्शी के संरक्षण में आयोजित हो रहा है।सम्मेलन के अध्यक्ष प्रोफेसर राकेश कुमार, विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग, एमएमएमयूटी ने आयोजन की अकादमिक दिशा और गुणवत्ता पर प्रकाश डाला। संयोजक डॉ. अवनीश कुमार एवं डॉ. लोकेंद्र सिंह उमराव ने सम्मेलन की योजना और क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी साझा की। पहले दिन की प्रमुख गतिविधियों में उद्घाटन सत्र, दो कीनोट व्याख्यान और 10 तकनीकी सत्र शामिल रहे, जिनमें कुल 44 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इन सत्रों में डीप लर्निंग आधारित इमेज प्रोसेसिंग, ऑगमेंटेड इंटेलिजेंस और वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों पर गहन चर्चाएं हुईं।प्रथम कीनोट व्याख्यान में प्रोफेसर अनिल कुमार त्रिपाठी ने मशीन विजन एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अकादमिक तथा औद्योगिक अनुप्रयोगों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्वास्थ्य, सुरक्षा, स्मार्ट सिटी और औद्योगिक स्वचालन में एआई-आधारित सिस्टम्स की भूमिका पर जोर दियादूसरे कीनोट व्याख्यान में प्रोफेसर रॉबर्ट ग्रीन ओबीई, प्रोफेसर ऑफ फॉरेंसिक साइंस एवं डायरेक्टर ऑफ स्टूडेंट एंगेजमेंट, यूनिवर्सिटी ऑफ केंट, कैंटरबरी, यूके ने फॉरेंसिक साइंस, कंप्यूटर विजन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आधुनिक मशीन विजन तकनीकें अपराध जांच, डिजिटल फॉरेंसिक्स और न्यायिक प्रक्रियाओं में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही हैं।कुलपति प्रोफेसर जय प्रकाश सैनी ने अपने संबोधन में कहा, “मानव मस्तिष्क सबसे उन्नत कंप्यूटर है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए मानव बुद्धि की गहराई को समझना अत्यंत आवश्यक है।” उन्होंने स्वास्थ्य सेवा, स्मार्ट टेक्नोलॉजी, सुरक्षा एवं उद्योग जैसे क्षेत्रों में मशीन विजन एवं एआई के बढ़ते प्रभाव पर भी जोर दिया।सम्मेलन का पहला दिन उच्च स्तरीय व्याख्यानों, गुणवत्तापूर्ण शोध प्रस्तुतियों और अकादमिक सहभागिता के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन शोधकर्ताओं, प्रैक्टिशनर्स और विद्यार्थियों के बीच ज्ञान-विनिमय, सहयोग और नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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