गाजीपुर। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही मकर संक्रांति का पावन पर्व ग्रामीण अंचलों में श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया गया। अहले सुबह से ही नदियों, तालाबों और घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने गंगा सहित अन्य पवित्र जलस्रोतों में स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया तथा दान-पुण्य कर पुण्य लाभ अर्जित किया। मकर संक्रांति के अवसर पर तिल, गुड़, खिचड़ी, दही-चूड़ा और तिल के लड्डुओं का विशेष महत्व रहा। घर-घर में पारंपरिक व्यंजन बनाए गए और रिश्तेदारों व पड़ोसियों के साथ साझा किए गए। ग्रामीण इलाकों में बच्चों और युवाओं ने पतंगबाजी का भरपूर आनंद लिया, जिससे आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से सजा नजर आया। इस मौके पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, हवन और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। वहीं, जरूरतमंदों को कंबल, वस्त्र और खाद्यान्न का दान कर लोगों ने सामाजिक सद्भाव और सेवा भावना का परिचय दिया। स्थानीय प्रशासन द्वारा घाटों पर सुरक्षा और साफ-सफाई के पुख्ता इंतजाम किए गए।पंडितों के अनुसार मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है, जिसे शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का संकेत माना जाता है। इस दिन स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। कुल मिलाकर मकर संक्रांति का पर्व ग्रामीण क्षेत्रों में पूरे दिन उल्लास, भाईचारे और लोकसंस्कृति की झलक दिखाता रहा। सुबह सूर्योदय से पूर्व स्नान के बाद दिन भर दान-पुण्य का क्रम चलता रहा। लोग एक-दूसरे से मिलकर पर्व की बधाइयां देते नजर आए। सबसे अधिक खुशी छोटे बच्चों के चेहरों पर दिखी, जिन्होंने खिली धूप में पूरे दिन पतंगबाजी का भरपूर आनंद उठाया।
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