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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर में दो दिवसीय कार्यशाला संपन्‍न

लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी), गोरखपुर के सूचना प्रौद्योगिकी एवं कंप्यूटर एप्लीकेशन (आईटीसीए) विभाग द्वारा “एनबीए प्रत्यायन हेतु नवीन स्व-मूल्यांकन प्रतिवेदन (Self-Assessment Report – SAR) तैयार करने की प्रक्रिया” विषय पर 30 एवं 31 जनवरी 2026 को अटल भवन स्थित सम्मेलन कक्ष में दो दिवसीय कार्यशाला का सफल एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारम्भ पारंपरिक दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना तथा विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो. वी. के. गिरी, अधिष्ठाता – फैकल्टी अफेयर्स ने की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव, वित्त नियंत्रक, परीक्षा नियंत्रक, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ संकाय सदस्य, शोधार्थी, प्रतिभागी एवं मीडिया प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अपने उद्घाटन संबोधन में प्रो. वी. के. गिरी ने कहा कि एनबीए प्रत्यायन उच्च तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता, पारदर्शिता और परिणाम-आधारित शिक्षा को सुनिश्चित करने का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि स्व-मूल्यांकन प्रतिवेदन (SAR) संस्थान की शैक्षणिक उपलब्धियों, शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, बुनियादी ढांचे, अनुसंधान एवं निरंतर सुधार की प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने इस प्रकार की कार्यशालाओं को संकाय सदस्यों के व्यावसायिक विकास हेतु अत्यंत आवश्यक बताते हुए आयोजन विभाग की सराहना की। इस दो दिवसीय कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से 190 संकाय सदस्यों ने सहभागिता की। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य संकाय सदस्यों को एनबीए के नवीन दिशानिर्देशों, प्रत्यायन मानदंडों एवं दस्तावेजीकरण प्रक्रिया से व्यावहारिक रूप से परिचित कराना था। विशेषज्ञों द्वारा यह भी बताया गया कि एनबीए प्रत्यायन से छात्रों की रोजगार-क्षमता बढ़ती है, वॉशिंगटन अकॉर्ड के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त होती है तथा संस्थानों को स्वायत्तता एवं वित्तीय संसाधनों तक पहुँच प्राप्त करने में सहायता मिलती है। कार्यशाला में एनबीए के सभी नौ मानदंडों (मानदंड 1 से मानदंड 9) पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। कार्यशाला के विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य संसाधन व्यक्ति डॉ. संदीप शिवराम पेंढारी, एसोसिएट प्रोफेसर, वीरमाता जीजाबाई प्रौद्योगिकी संस्थान (VJTI), मुंबई, जो कि एक अनुभवी एनबीए विषय विशेषज्ञ हैं, ने SAR की संरचना, प्रोग्राम आउटकम्स, कोर्स आउटकम्स, मैपिंग प्रक्रिया तथा साक्ष्य आधारित दस्तावेजीकरण पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उनके सत्र अत्यंत संवादात्मक रहे, जिनमें प्रतिभागियों ने अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किए। द्वितीय दिवस पर प्रो. आर. वी. रंगनाथ, प्रोवोस्ट (इंजीनियरिंग एवं एलाइड साइंसेज़), अधिष्ठाता – अकादमिक्स एवं अधिष्ठाता – गुणवत्ता आश्वासन, एम. एस. रामैय्या यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज़, बेंगलुरु ने Outcome-Based Education, एनबीए मूल्यांकन प्रक्रिया, SAR मूल्यांकन मानदंड तथा वॉशिंगटन अकॉर्ड से संबंधित अंतरराष्ट्रीय आवश्यकताओं पर गहन जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल प्रत्यायन प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सतत एवं निरंतर प्रक्रिया है। कार्यशाला के चेयरमैन प्रो. डी. एस. सिंह, विभागाध्यक्ष, आईटीसीए ने मुख्य अतिथि, अतिथियों, प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ संकाय सदस्यों को संस्थागत गुणवत्ता सुधार की दिशा में सशक्त बनाती हैं। कार्यशाला का समन्वयन डॉ. औधिथन शिवरामन, डॉ. आशीष श्रीवास्तव एवं सुश्री कुमुद पटेल द्वारा किया गया। कार्यक्रम के सुचारु संचालन में सुश्री प्राची वर्मा की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। कार्यशाला के समापन अवसर पर आयोजित प्रमाण-पत्र वितरण समारोह में माननीय कुलपति प्रो. जे. पी. सैनी, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ एवं एमएमएमयूटी, गोरखपुर द्वारा प्रतिभागी संकाय सदस्यों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। अपने समापन संबोधन में कुलपति महोदय ने कहा कि कार्यशाला से अर्जित ज्ञान यदि विभागीय एवं संस्थागत स्तर पर प्रभावी रूप से लागू किया जाए, तो इससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। कार्यशाला में प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता एवं सकारात्मक प्रतिक्रिया इसे अत्यंत सफल बनाती है। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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