गाजीपुर! अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग (SC/ST/OBC) अधिवक्ता संघ ने उच्च शिक्षा में भेदभाव रोकने वाले यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस) रेगुलेशंस, 2026 का समर्थन किया है। यह विनियम 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित हुआ था, जो 2012 के पुराने दिशानिर्देशों की जगह लेता है।शनिवार को गाजीपुर कचहरी परिसर में सिविल बार और कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अधिवक्ता सुबह करीब 10:30 बजे इकट्ठा हुए। नारे लगाते हुए वे लगभग 11 बजे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और विनियम के समर्थन में प्रदर्शन किया।अपर जिला मजिस्ट्रेट (सदर) विनोद जोशी को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मांग की गई यूजीसी विनियम 2026 को संसद में पारित कर शीघ्र लागू किया जाए। क्रियान्वयन में आने वाली किसी भी बाधा को दूर किया जाए। विनियम का विरोध करने वाले, अफवाह फैलाने वाले या कैंपस में हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, जिसमें NSA/UAPA जैसे कानून शामिल हों। सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में Equity Committee और Equal Opportunity Centres अनिवार्य। SC, ST, OBC, दिव्यांगजन तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के खिलाफ भेदभाव की शिकायतों पर समयबद्ध जांच।भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा, जिसमें जाति आधारित भेदभाव विशेष रूप से शामिल। संस्थानों पर गैर-अनुपालन के लिए दंड (जुर्माना, अनुदान रोकना आदि)। यह विनियम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समानता और समावेशन सिद्धांतों पर आधारित है। अधिवक्ता संघ इसे पिछड़े वर्गों के लिए न्याय सुनिश्चित करने वाला कदम मानता है। संघ का कहना है कि यह पिछड़े वर्गों के हित में जरूरी है।अपर जिला मजिस्ट्रेट विनोद जोशी ने ज्ञापन लिया और राष्ट्रपति तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।ज्ञापन सौंपने वाले प्रमुख अधिवक्ता आत्मा यादव, रामानंद गौतम, संजय सिंह कुशवाहा, अशोक भारती, आनंद शंकर कुशवाहा, शंकर यादव, शिवदयाल बिन्द, वीरेंद्र पाल, समता बिन्द, पिंकी, अखिल कुमार शर्मा, अजय कुमार, उपेंद्र कुमार, संजय कनौजिया, रमेश यादव सहित अन्य।
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