वाराणसी। अशोका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट में चल रहे दो दिवसीय आईट्रिपल-ई इंडिया काउंसिल का स्वर्ण जयंती समारोह सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में देशभर से आए तकनीकी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और इंजीनियरिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों ने सहभागिता की। समारोह का उद्देश्य तकनीकी शिक्षा, नवाचार और युवाओं में शोध एवं रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आईट्रिपल-ई के पूर्व चेयर एवं ओएनजीसी के पूर्व मुख्य महाप्रबंधक इं. दीपक माथुर रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आईट्रिपल-ई इंजीनियरिंग पेशेवरों का एक वैश्विक संगठन है, जो तकनीकी विशेषज्ञों को अपनी प्रतिभा निखारने, नए विचार विकसित करने और शोध कार्यों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों को प्रयोगधर्मी और नवाचारी बनने की आवश्यकता है, क्योंकि एक नया विचार समाज और देश में परिवर्तन की बड़ी क्रांति ला सकता है। आईट्रिपल-ई इंडियाकाउंसिल की चेयर डॉ. प्रेरणा गौर ने कहा कि लगभग 150 वर्ष पुरानी यह संस्था आज दुनिया के 190 देशों में करीब पांच लाख सदस्यों के साथ कार्य कर रही है। भारत में यह संस्था वर्ष 1976 से सक्रिय है और आज इसकी 50वीं वर्षगांठ मनाना गौरव का विषय है। उन्होंने छात्रों के साथ हुए प्रत्यक्ष संवाद को अत्यंत उपयोगी बताया। विशिष्ट अतिथि आईट्रिपल-ई इंडियाकाउंसिल की इलेक्टेड चेयर डॉ. प्रीति बजाज ने कहा कि किसी भी व्यवहारिक क्रियान्वयन की शुरुआत विचार प्रक्रिया से होती है। विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में बीते पांच दशक परिवर्तनकारी रहे हैं और आने वाला समय इससे भी अधिक क्रांतिकारी होगा।डॉ. देबव्रत दास, आईट्रिपल-ई इंडिया काउंसिल के पूर्व चेयर एवं ट्रिपल आईटी बैंगलुरु के निदेशक ने कहा कि सीखने की प्रक्रिया जन्म के पाँच महीने बाद ही प्रारंभ हो जाती है और जीवनभर निरंतर चलती रहती है। छात्रों को निरंतर सीखने, शोध करने और नई तकनीकों के साथ स्वयं को अपडेट रखने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से जिज्ञासु बनने और समस्याओं के समाधान के लिए तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने का आह्वान किया। आईट्रिपल-ई इंडिया काउंसिल के पूर्व चेयर इं. दीपक माथुर ने कहा नेचुरल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का संतुलित प्रयोग नवाचार के नए अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि मानव बुद्धिमत्ता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय से विज्ञान एवं तकनीकी के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन संभव हैं। आने वाले समय में वही लोग अधिक सफल होंगे जो नई तकनीकों को समझकर उनका प्रभावी उपयोग करना सीखेंगे। उन्होंने छात्रों को रचनात्मक सोच विकसित करने और तकनीकी कौशल बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। आईट्रिपल-ई इंडिया काउंसिल के पूर्व चेयरएवं सी.टी.ओ. टाटा एड्वान्स सिस्टम इंडिया, इं.आर.मुरलीधरन ने कहा कि सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी पर कार्य करने की आवश्यकता है, जो नैतिक मूल्यों पर आधारित होने के साथ-साथ समाज के लिए भी उपयोगी हो। उन्होंने कहा कि तकनीकी विकास का उद्देश्य केवल आर्थिक प्रगति नहीं, मानव जीवन को बेहतर बनाना भी होना चाहिए। उन्होंने युवाओं से ऐसी तकनीकों के विकास पर ध्यान देने का आह्वान किया, जो भविष्य की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर सकें। Top of FormBottom of Formइस अवसर पर अशोका के चेयरमैन इ. अंकित मौर्य ने कहाकि यंग प्रोफेशनल के लिए आईट्रिपल-ई संस्था बेहद उपयोगी है। जो उनके कैरियर को सवारने में मदद करती है। वाइस चेयरमैन डॉ. अमित मौर्य, ने कहाकि आईट्रिपल-ई का मंच आपके नवाचार को राष्ट्रीय व वैश्विक पहचान दिलाने में मददगार होता है इसीलिए छात्रों को इससे जुड़ना चाहिए। इस अवसर पर अशोका स्कूल ऑफ बिजनेस के एम.डी अनुभव मौर्या उपथित रहे और आए अतिथियों को पौधा, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका स्वागत किया।इस अवसर पर डायरेक्टर डॉ. सारिका श्रीवास्तव ने कहा कि अशोका इंस्टीट्यूटमें आईट्रिपल-ई इंडिया काउंसिलकी स्वर्ण जयंती का आयोजन संस्थान के लिए गर्व का विषय है। साथ ही उन्होंने ने आईट्रिपल-ई इंडिया काउंसिल की अशोक ब्रांच की प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की। आईट्रिपल-ई इंडिया काउंसिल के पूर्व चेयर इं. राजेंद्र कुमार अस्थाना, आईट्रिपल-ई इंडिया काउंसिल के पूर्व चेयर डॉ. देबव्रत दास, डॉ. राजश्री जैनआईट्रिपल-ई इंडिया काउंसिल की कोषाध्यक्ष, डॉ. गीतम तोमर आईट्रिपल-ई इंडिया काउंसिल मद्यप्रादेश के चेयर एवं सहित कई विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किए। समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में छात्रों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं। संचालन डॉ. अनुजा सिंह एवं डॉ. हसीबुदीन ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन आईट्रिपल-ई इंडिया काउंसिल के सचिव डॉ. नंदन एन. ने ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संयोजन इं.सोमेन्द्र बनर्जी ने किया।
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