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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर के तीन शोध छात्रों को मिला पोस्‍ट डॉक्टोरल फेलोशिप

लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर के तीन पी एच डी छात्रों क्रमशः डॉ प्रवीण कुमार सिंह, डॉ सुरभि अग्रवाल, और डॉ मयंक श्रीवास्तव को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में शोध कार्य हेतु पोस्ट डॉक्टोरल फेलोशिप प्रदान की गई है। खास बात यह है कि ये तीनों छात्र विश्वविद्यालय के भौतिकी एवं पदार्थ विज्ञान विभाग के पी एच डी छात्र रहे हैं और तीनों विद्यार्थियों ने विभाग के प्रो डी के द्विवेदी के ही निर्देशन में शोध कार्य किया है। इन तीन में से डॉ प्रवीण कुमार सिंह को विश्व की प्रतिष्ठित ‘एलेग्जेंडर वॉन हमबोल्ट फाउंडेशन’ द्वारा दी जाने वाली हमबोल्ट एक्सपीरियंस्ड रिसर्चर फेलोशिप प्रदान की गई हैं। यह फेलोशिप प्रतिवर्ष विश्व के चुनिंदा अनुभवी शोधकर्ताओं को उच्च स्तरीय शोध कार्य के लिए दी जाती है। इस फ़ेलोशिप के अंतर्गत डॉ प्रवीण कुमार सिंह,  रूर यूनिवर्सिटी, बोखुम, जर्मनी में प्रोफेसर थॉमस अर्नेस्ट म्युलर के साथ ट्राइबोइलेक्ट्रिक नैनोजनरेटर पर करेंगे।  ट्राइबोइलेक्ट्रिक नैनोजेनरेटर (Triboelectric Nanogenerator–TENG) तकनीक घर्षण, कंपन, मानव गतिविधियों, वाहन गति तथा पर्यावरणीय यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने में सक्षम है। इस पर शोध से कम लागत, पर्यावरण-अनुकूल एवं स्व-शक्तिसंपन्न (Self-Powered) उपकरणों के विकास को बढ़ावा मिलता है, जो इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), पहनने योग्य इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्ट सेंसर, स्वास्थ्य निगरानी प्रणालियों तथा दूरस्थ क्षेत्रों में ऊर्जा आपूर्ति जैसी आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, यह तकनीक पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करने तथा सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेगी। इसी प्रकार, डॉ प्रशांत श्रीवास्तव को रेडिकल रिएक्शन्स रिसर्च सेंटर, केमिकल साइंसेज डिपार्टमेंट, एरियल यूनिवर्सिटी, इजरायल द्वारा पोस्ट डॉक्टोरल फेलोशिप प्रदान की गई है जहाँ वे प्रो हाया कॉर्नवेट्ज के साथ सतह उत्प्रेरण आधुनिक ऊर्जा प्रौद्योगिकी की दिशा में शोध करेंगे। इस शोध के परिणामस्वरूप उच्च दक्षता वाले उत्प्रेरकों के विकास में सहायता मिलेगी, जो हरित हाइड्रोजन उत्पादन, कार्बन डाइऑक्साइड का मूल्य-वर्धित ईंधनों एवं रसायनों में रूपांतरण, सौर-चालित ईंधन संश्लेषण तथा सतत रासायनिक निर्माण प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बना सकेंगे। दीर्घकालिक रूप से यह कार्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी और ग्रीनहाउस गैसों का उपयोगी एवं मूल्य-संवर्धित ईंधनों में परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग तथा स्वच्छ एवं सुरक्षित ऊर्जा भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करेगा। तीसरी शोध छात्रा डॉ सुरभि अग्रवाल को डिपार्टमेंट ऑफ न्यूट्रॉन एंड आयन मैथड्स, न्यूक्लियर फिजिक्स इंस्टीट्यूट, चेक गणराज्य  द्वारा पोस्ट डॉक्टरल फेलोशिप प्रदान की गई है जहां वे प्रो ज़िरी वाचिक के साथ फेरोइक मल्टीफंक्शनैलिटीज (Ferroic Multifunctionalities) पर शोध करेंगीं। फेरोइक मल्टीफंक्शनैलिटीज पर शोध से ऐसे उन्नत पदार्थों के विकास का मार्ग प्रशस्त होता है जिनमें चुंबकीय, विद्युत, यांत्रिक तथा तापीय गुण एक साथ नियंत्रित किए जा सकते हैं। इस क्षेत्र में अनुसंधान से ऊर्जा-कुशल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, उच्च क्षमता वाली मेमोरी प्रणालियों, स्मार्ट सेंसरों, एक्ट्यूएटर्स तथा अगली पीढ़ी की संचार तकनीकों के विकास को गति मिलेगी। इसके अतिरिक्त, फेरोइक पदार्थों की बहुक्रियात्मक विशेषताएं ऊर्जा संरक्षण, डेटा भंडारण और चिकित्सा उपकरणों की दक्षता बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होंगी। एक साथ एक ही विभाग के तीन शोध छात्रों को प्रतिष्ठित पोस्ट डॉक्टरल फेलोशिप मिलने की सूचना मिलने पर माननीय कुलपति महोदया प्रो अनुपमा कौशिक शर्मा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल संबंधित शोधार्थियों और उनके शोध निदेशक प्रो. डी. के. द्विवेदी के उत्कृष्ट मार्गदर्शन का परिणाम है, बल्कि विश्वविद्यालय में विकसित हो रही उच्च स्तरीय शोध संस्कृति का भी प्रमाण है। उन्होंने कहा कि ट्राइबोइलेक्ट्रिक नैनोजेनरेटर, उन्नत उत्प्रेरण तथा फेरोइक मल्टीफंक्शनैलिटीज जैसे अत्याधुनिक एवं समाजोपयोगी विषयों पर हमारे शोधार्थियों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चयन होना इस बात का संकेत है कि एमएमएमयूटी के शोध कार्य वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में अपनी पहचान बना रहे हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इन शोधार्थियों द्वारा अर्जित ज्ञान एवं अनुभव भविष्य में देश के वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे तथा विश्वविद्यालय के अन्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों को भी उत्कृष्ट शोध के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने तीनों शोधार्थियों, उनके शोध निदेशक तथा भौतिकी एवं पदार्थ विज्ञान विभाग को इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

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