लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर के एक शोधार्थी ने नवीकरणीय ऊर्जा अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए ऐसी उन्नत ग्रेडिंग तकनीक विकसित की है, जो अगली पीढ़ी के सौर सेल की दक्षता, स्थिरता तथा पर्यावरणीय अनुकूलता में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकती है। भौतिकी एवं मैटेरियल साइंस विभाग के शोधार्थी आकाश आनंद वर्मा ने यह शोध कार्य प्रो. डी. के. द्विवेदी के निर्देशन में सम्पन्न किया। यह अध्ययन लेड-फ्री पेरोव्स्काइट सोलर सेल्स की कुशलता को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। यह उभरती हुई सौर तकनीक विषैले लेड के उपयोग को समाप्त करती है तथा पारंपरिक उच्च-दक्षता वाले सौर सेल्स की तुलना में अधिक सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल विकल्प प्रदान करती है। शोध में पाया गया कि पैराबोलिक बैंडगैप ग्रेडिंग की नवीन पद्धति प्रकाश अवशोषण को बढ़ाती है तथा सौर सेल के भीतर विद्युत करेंट के तीव्र एवं अधिक प्रभावी परिवहन को संभव बनाती है। इसके परिणामस्वरूप ऊर्जा क्षरण में उल्लेखनीय कमी आती है और पावर कन्वर्ज़न एफिशिएंसी (ऊर्जा के एक रूप से दूसरे रुप रूपांतरण) में वृद्धि होती है। यह तकनीक समान मात्रा के सूर्यप्रकाश से अधिक विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने में सक्षम है, जिससे सौर ऊर्जा प्रणालियाँ अधिक उत्पादक और लागत-प्रभावी बन सकती हैं। दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ यह नवाचार गैर-विषैले पदार्थों के उपयोग को प्रोत्साहित कर सतत ऊर्जा विकास को भी बढ़ावा देता है तथा वर्तमान सौर ऊर्जा उत्पादन के नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव को कम करता है। यह तकनीक कम लागत वाले, उच्च-क्षमता के सौर पैनलों के विकास में सहायक हो सकती है, जो कम प्रकाश की परिस्थितियों में भी विश्वसनीय ऊर्जा उपलब्ध करा सकें। इससे शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा की पहुंच का विस्तार संभव होगा। उन्नत कम्प्यूटेशनल सिमुलेशन्स के माध्यम से शोध में ऐसे डिजाइन पैरामीटर्स की पहचान की गई है, जो प्रदर्शन और दीर्घकालिक विश्वसनीयता दोनों में सुधार करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध बिल्डिंग-इंटीग्रेटेड सोलर सिस्टम्स, ऊर्जा-कुशल स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर तथा सोलर-इंटीग्रेटेड विंडोज़ वाले स्व-ऊर्जित भवनों जैसी भविष्य की तकनीकों के विकास को गति प्रदान कर सकता है। इस शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना प्राप्त हुई है। इसके परिणामस्वरूप प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में नौ शोध-पत्र प्रकाशित हुए हैं, जिनमें कई उच्च-प्रभाव वाले Q1 जर्नल्स भी शामिल हैं। यह उपलब्धि सतत एवं स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में वैश्विक महत्व के अनुसंधान में एम एम एम यू टी के बढ़ते योगदान को रेखांकित करती है। इस नवाचार की व्यावहारिक एवं व्यावसायिक संभावनाओं को देखते हुए शोधकर्ताओं ने इस तकनीक के पेटेंट की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर शोधार्थी आकाश आनंद वर्मा एवं उनके शोध निर्देशक प्रो. डी. के. द्विवेदी को बधाई दी। उन्होंने कहा, “यह शोध वैश्विक चुनौतियों के समाधान हेतु एम एम एम यू टी में किए जा रहे उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक कार्यों का उत्कृष्ट उदाहरण है। दक्ष एवं पर्यावरण-अनुकूल सौर सेल तकनीक का विकास सतत विकास और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप है। मैं शोधार्थी एवं उनके मार्गदर्शक को उनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देती हूँ तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हूँ।”

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