वाराणसी। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 11 दिसंबर 2014 को 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।यह इसका 12वाँ संस्करण है। तब से प्रतिवर्ष विश्वभर में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘Yoga for Healthy Ageing’ (स्वस्थ एवं सक्रिय वृद्धावस्था के लिए योग) है। यह थीम जीवन के प्रत्येक चरण में योग के महत्व को रेखांकित करती है तथा स्वस्थ, सक्रिय और गरिमापूर्ण जीवन के लिए योग को एक प्रभावी माध्यम के रूप में प्रस्तुत करती है।” योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। यह केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने की एक समग्र पद्धति है। नियमित योगाभ्यास से तनाव, चिंता, उच्च रक्तचाप, मोटापा तथा जीवनशैली से जुड़ी अनेक समस्याओं के जोखिम को कम करने में सहायता मिलती है। साथ ही यह मानसिक स्वास्थ्य एवं प्रतिरक्षा क्षमता को भी सुदृढ़ बनाता है। महिलाओं, विशेषकर गर्भवती महिलाओं के लिए योग अत्यंत लाभकारी माना जाता है। गर्भावस्था के दौरान होने वाले शारीरिक एवं हार्मोनल परिवर्तनों के कारण तनाव, थकान और भावनात्मक उतार-चढ़ाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। प्रशिक्षित विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में किया गया सुरक्षित योगाभ्यास मानसिक शांति प्रदान करने, शरीर को स्वस्थ रखने तथा गर्भस्थ शिशु के समुचित विकास में सहायक होता है। अतः इसे चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में योग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ एवं संतुलित जीवन जीने का माध्यम है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हमें यह संदेश देता है कि व्यक्तिगत स्वास्थ्य से ही परिवार, समाज और विश्व के स्वास्थ्य का मार्ग प्रशस्त होता है। अतः योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाकर हम स्वस्थ भारत और स्वस्थ विश्व के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।
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