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काशी यूथ समिट के अंतर्गत “मॉक पार्लियामेंट 2.0” का हुआ आयोजन

वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के मालवीय मूल्य अनुशीलन केन्द्र में भाषा विज्ञान विभाग, कला संकाय के शैक्षणिक सहयोग से शनिवार को “काशी यूथ समिट : मॉक पार्लियामेंट 2.0” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय परंपराओं, नेतृत्व क्षमता तथा रचनात्मक संवाद की संस्कृति को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने विचार रखने का अवसर प्रदान करना लोकतंत्र के मूल आधारों में से एक है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र विचारों की विविधता का सम्मान करता है तथा युवाओं को स्वतंत्र रूप से सोचने, प्रश्न पूछने और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि मॉक पार्लियामेंट जैसे आयोजन विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, प्रभावी अभिव्यक्ति, नेतृत्व क्षमता और संवाद कौशल का विकास करते हैं, जो किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि संसद की विभिन्न समितियाँ भी नीति-निर्माण की प्रक्रिया में समाज के विविध वर्गों और शिक्षाविदों के विचारों को महत्व देती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे आयोजनों को सोशल मीडिया के ज़रिए व्यापक स्तर पर साझा किया जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक युवा लोकतांत्रिक संवाद और संसदीय परंपराओं से प्रेरणा प्राप्त कर सकें। विशिष्ट अतिथि प्रो. सुषमा घिल्डियाल, संकाय प्रमुख, कला संकाय ने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए ऐसा वातावरण प्रदान करता है, जहाँ वे अपनी प्रतिभा, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास कर सकें। उन्होंने कहा कि समसामयिक विषयों पर युवाओं के बीच गंभीर एवं रचनात्मक विमर्श समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश के भावी नागरिक यदि महत्वपूर्ण विषयों पर संवेदनशीलता, तर्क और ज़िम्मेदारी के साथ विचार करेंगे तथा सकारात्मक समाधान प्रस्तुत करेंगे, तो यह एक सशक्त और विकसित राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान होगा। विशिष्ट अतिथि प्रो. रंजन कुमार सिंह, छात्र अधिष्ठाता ने कहा कि मॉक पार्लियामेंट के लिए चयनित विषय वर्तमान समय के अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रासंगिक मुद्दों से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में प्रभावी अभिव्यक्ति, संवाद कौशल और आत्मविश्वास का विकास करते हैं, जो उनके शैक्षणिक जीवन के साथ-साथ भविष्य के सामाजिक एवं व्यावसायिक जीवन में भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। कार्यक्रम के संयोजक प्रो. अभिनव कुमार मिश्र, विभागाध्यक्ष, भाषा विज्ञान विभाग ने कहा कि “काशी यूथ समिट विचारों की रचनात्मक क्रांति का मंच है। इसका उद्देश्य युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय परंपराओं और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर सार्थक एवं तथ्यपरक संवाद का अवसर प्रदान करना है। इस वर्ष लगभग 200 प्रतिभागियों ने वाराणसी के विभिन्न विद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों से भाग लिया, जो इस पहल की व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है। भाषा विज्ञान विभाग के लिए इस मंच से जुड़ना गर्व का विषय है, क्योंकि भाषा ही विचारों के आदान-प्रदान, विमर्श और लोकतांत्रिक संवाद का सबसे प्रभावी माध्यम है।” समापन समारोह में स्वागत उद्बोधन सौम्या शुक्ला ने दिया। प्रतियोगिता में लगभग 170 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। मॉक पार्लियामेंट के अंतर्गत प्रतिभागियों ने लोकसभा, ऑल इंडिया पॉलिटिकल पार्टी मीट (एआईपीपीएम) तथा संयुक्त राष्ट्र महिला स्थिति आयोग (यूएनएससीडब्ल्यू) की कार्यप्रणाली का अनुकरण करते हुए पेपर लीक, ट्रांसजेंडर अधिकार तथा अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं के अधिकार एवं सुरक्षा जैसे समसामयिक विषयों पर लोकतांत्रिक एवं संसदीय शैली में पक्ष और विपक्ष के दृष्टिकोण से सारगर्भित वाद-विवाद प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में विभिन्न समितियों के उत्कृष्ट प्रतिभागियों एवं विजेताओं को सम्मानित किया गया। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने काशी यूथ समिट के सचिवालय के सदस्यों, निर्णायकों एवं आयोजकों को उनके सफल आयोजन के लिए सम्मानित किया। विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए प्रतिभागी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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