लखनऊ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर में प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कुलपति प्रो अनुपमा कौशिक शर्मा द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण प्रशासनिक फ़ेरबदल किए गए हैं। भौतिकी विभाग के प्रो डी के द्विवेदी को अधिष्ठाता, अंतर्राष्ट्रीय मामले नियुक्त किया गया है। वे इस दायित्व का निर्वहन प्रो वी के द्विवेदी के स्थान पर करेंगे, जो अब तक अधिष्ठाता, अंतर्राष्ट्रीय मामले के साथ-साथ प्रोफेसर इंचार्ज, ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट का दायित्व भी संभाल रहे थे। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के प्रो आर के चौहान को विभागाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वे प्रो एस के सोनी का स्थान लेंगे, जिनका विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यकाल 30 जून, 2026 को पूर्ण हो रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के प्रो एस के सोनी को विश्वविद्यालय का नियंता नियुक्त किया गया है। वे इस दायित्व का निर्वहन प्रो ए के पाण्डेय, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के स्थान पर करेंगे, जो 30 जून, 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग की डॉ. शिखा सिंह को सह अधिष्ठाता, अंतर्राष्ट्रीय मामले (एम ओ यू) नियुक्त किया गया है। वे प्रो. प्रभाकर तिवारी, सह अधिष्ठाता, अंतर्राष्ट्रीय मामले (प्रशासन) के साथ मिलकर अधिष्ठाता, अंतर्राष्ट्रीय मामले के समग्र पर्यवेक्षण में कार्य करेंगी। सिविल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. विनय कुमार सिंह को सह अधिष्ठाता, अवस्थापना एवं नियोजन (मरम्मत) नियुक्त किया गया है। वे डॉ रोहित कुमार, सह अधिष्ठाता, अवस्थापना एवं नियोजन (नवीन निर्माण एवं विविध) के साथ मिलकर अधिष्ठाता, अवस्थापना एवं नियोजन के समग्र पर्यवेक्षण में अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे। केमिकल इंजीनियरिंग विभाग की डॉ. ज्योति शर्मा को सह अधिष्ठाता, विस्तार गतिविधियां ( एलुमनाई) नियुक्त किया गया है। वे डॉ. अवधेश कुमार, सह अधिष्ठाता, विस्तार गतिविधियां के साथ मिलकर अधिष्ठाता, विस्तार गतिविधियां एवं एलुमनाई अफेयर्स के समग्र पर्यवेक्षण में कार्य करेंगी। इसके अतिरिक्त, सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो ए के मिश्र आगामी आदेशों तक विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य करते रहेंगे। गणित एवं वैज्ञानिक संगणन विभाग के प्रो वी के मिश्र, अधिष्ठाता, स्नातक अध्ययन तथा भौतिकी विभाग के प्रो बी के पाण्डेय अध्यक्ष, छात्र क्रिया कलाप परिषद के रूप में 30 सितम्बर, 2026 अथवा अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे।
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